CBI जांच : कांग्रेस में हुआ ‘MP का नर्सिंग घोटाला’, देखिए…किसने कब और कैसे किया घोटाला

भोपाल, डी.के. की रिपोर्ट। याद कीजिए वह साल 2018…. जिसमें मध्यप्रदेश में बहुत कम अंतरों से जीतकर कांग्रेस की सरकार बनी थी। करीब 15 महीने में ही इस सरकार ने ऐसे -ऐसे कांड कर दिया कि आज जांच सीबीआई को सौंपनी पड़ रही है। महज डेढ़ साल के लिए मुख्यमंत्री बने कमल नाथ पर तबादला उद्योग चलाने का आरोप भी लगा था। बाद में मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकार बनी तो कई परतें खुलीं। ताजा मामला ताजा मामला नर्सिंग घोटाले से जुड़ा है। दरअसल, वर्ष 2019-2020 में मध्यप्रदेश नर्सिंग काउंसिल ने प्रदेश के 250 कॉलेजों को मान्यता प्रदान की थी। इनमें से अधिकांश कॉलेज नियमों को पूरा नहीं करते थे, फिर भी कांग्रेस सरकार ने इन्हें मान्यता दे दी थी। मामले के सामने आने से एमपी नर्सिंग काउंसिल, मेडिकल यूनिवर्सिटी जबलपुर व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मुश्किल बढ़ गई हैं।क्योंकि हर स्तर पर कॉलेजों को मान्यता व संबद्धता देने में गड़बड़ी मिली है।

मध्यप्रदेश में घोटाला ही घोटाला: कमल नाथ
मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व में मुख्यमंत्री रहे कमल नाथ ने ट्वीट करके सरकार पर निशाना साधा है, उन्होंने कहा – ’मध्यप्रदेश में व्यापमं की तरह घोटाले जारी, हर योजना में भ्रष्टाचार, हर काम में फर्जीवाड़ा’

कांग्रेस शासनकाल का है घोटाला: विश्वास सारंग
जब कमलनाथ ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा तो मध्यप्रदेश सरकार के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने पलटवार किया। मीडिया से चर्चा में सारंग ने कहा कि उन्हें ज्ञान की कमी है, जिन 35 कॉलेज की जांच सीबीआई को सौंपी गई है, उन्हें मान्यता कमल नाथ सरकार के दौरान ही प्रदान की गई थी।

एक नजर में समझिए पूरा मामला…
मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल ने मध्य प्रदेश में सत्र 2019-20 में 520 कालेजों को संबद्धता दी थी। इन कॉलेजों में ग्वालियर के 35 कॉलेज भी शामिल हैं। शिकायत के बाद 35 में से एक कॉलेज की संबद्धता के रिकॉर्ड की जांच पड़ताल की गई। इससे पहले हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा विभाग के डीएमई, इंडियन नर्सिंग काउंसिल के सचिव व सीबीआई के एक अधिकारी को तलब किया था। जो कोर्ट में पेश हुए है। अतिरिक्त महाधिवक्ता ने रिकॉर्ड की जांच कर गड़बड़ियां हाई कोर्ट में बताई हैं। इसके बाद संबद्धता के पूरे मामले को ग्‍वालियर हाईकोर्ट ने सीबीआई के सुपुर्द कर दिया गया है। इस मामले पर अगली सुनवाई 5 जनवरी को होगी।

मरीज के की जान से खिलवाड़: हाई कोर्ट
सुनवाई कर रहे जज ने कहा कि इन कॉलेज से पास हो रहे विद्यार्थियों को मेडिकल की जानकारी नहीं है। ऐसे छात्र नर्स बनकर अस्पतालों में सेवाएं देंगे तो मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ होना तय है। अगर यह आपरेशन थियेटर में काम काम करेंगे तो सोचिए क्या होगा?

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