शिमला मिर्च

इसमें कई तरह के पोषक तत्व होते हैं। अंडे या ऑमलेट में पीले, हरे या लाल शिमला मिर्च का इस्तेमाल करने से ऑमलेट सुंदर और स्वादिष्ट नजर आता है।
शिमला मिर्च में विटामिन सी पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है, जो वसा को कम करता है। स्टडी में पाया गया है कि विटामिन सी मांसपेशियों को कार्निटिन नामक फैटी एसिड को संसाधित करने में मदद करता है, जो मांसपेशियों की वृद्धि और रिकवरी के लिए जरूरी है।
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काली मिर्च

ऑमलेट पर काली मिर्च का पाउडर छिड़कने से न केवल इसका स्वाद लाजवाब हो जाता है बल्कि यह वजन कम करने में भी मदद करता है।
काली मिर्च में पिपेरिन होता है जिसके कारण इसका स्वाद कड़वा होता है। यह नई वसा कोशिकाओं को बनने से रोकती है। काली मिर्च कमर और पेट की चर्बी एवं कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करती है।
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काली बीन्स या काले सेम

काली बीन्स में पर्याप्त मात्रा में घुलनशील फाइबर होता है, जो पेट को लंबे समय तक भरा रखता है और फैट बर्न करने में मदद करता है। स्टडी के अनुसार, रोजाना 10 ग्राम से अधिक घुलनशील फाइबर का सेवन करने से पांच सालों में पेट की चर्बी 3.7 प्रतिशत कम हो सकती है। इसके अलावा काली बीन्स 5 प्रतिशत तक एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को भी कम करती है।
नारियल तेल

सभी तरह के फैट एक जैसे नहीं होते हैं। सोयाबीन तेल में पाया जाने वाला फैट वजन बढ़ाता है जबकि नारियल तेल में मौजूद वसा वजन कम करता है। स्टडी के अनुसार, 2 चम्मच नारियल तेल का रोजाना सेवन करने से कमर की चर्बी 1.1 इंच कम हो सकती है। इसके अलावा नारियल तेल से कोलेस्ट्रॉल भी नहीं बढ़ता है और सेहत अच्छी रहती है।
क्विनोआ के साथ

ऑमलेट में टोस्ट की जगह क्विनोआ का इस्तेमाल करना एक हेल्दी विकल्प है। इससे न केवल ऑमलेट का टेस्ट बढ़ जाता है बल्कि यह सेहत के लिए भी फायदेमंद होता है। क्विनोआ में भरपूर मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है। इसके साथ ही संतृप्त वसा और फाइबर भी पाया जाता है। यह वजन को नियंत्रित रखने में मदद करता है।
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