सभी की नजरें गिलिएड साइंस की एंटीवायरल ड्रग रेमडेसिविर पर हैं. अमेरिकी सरकार के टॉप संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ एंथनी फौसी ने इस ड्रग के अहम क्लिनिकल ट्रायल के शुरुआती नतीजों को नोवेल कोरोनावायरस से लड़ाई की दिशा में ‘गुड न्यूज़’ बताया है. शुरुआती नतीजे बताते हैं कि जिन मरीजों को रेमडेसिविर दी गई वो उन मरीजों की तुलना में 31% तेजी से रिकवर हुए जिन्हें प्लेसीबो दी गई.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रेमडेसिविर ड्रग ट्रायल को “वैक्सीन बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने वाला कदम” बताया. फौसी ने कहा, “एफडीए गिलिएड के साथ काम कर रहा है ताकि जरूरतमंदों को इसे आसानी से उपलब्ध कराया जा सके.” अमेरिका में एलर्जी और संक्रामक रोगों के नेशनल इंस्टीट्यूट ने 1,063 मरीजों पर ट्रायल के शुरुआती नतीजों के बारे में बताया. इसके मुताबिक अस्पताल में भर्ती हुए COVID-19 मरीजों में से जिन्हें रेमडेसिविर दी गई थी वो 11 दिनों में रिकवर हो गए. वहीं जिन्हें प्लेसीबो दी गई थी वो 15 दिनों में रिकवर हुए.
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स्टडी में यह भी सामने आया कि रेमडेसिविर ग्रुप वाले मरीजों में 8% की मौत हुई वहीं प्लेसीबो ग्रुप में मृत्यु दर 11.6% रही. हालांकि यह अंतर आंकड़ों के लिहाज से इतना अहम नहीं था. क्योंकि ये ज़रूरी नहीं कि इसका कारण रेमडेसिविर ड्रग ही रहा हो.
ICMR ने क्या कहा था
भारत वैक्सीन के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के साझे ट्रायल्स का हिस्सा है. इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के निदेशक डॉ रमन गंगाखेडकर ने पहले कहा था कि भारत ने रेमडेसिविर के ट्रायल्स पर नजर बना रखी है और उससे जुड़ा डेटा इकट्ठा किया जा रहा है.
डॉ गंगाखेडकर ने 13 अप्रैल को कहा था, ‘’यह गिलिएड कंपनी द्वारा बनाया गया एक उत्पाद है. WHO के साथ ICMR साझा ट्रायल्स में हिस्सा ले रहा है. इस साझा ट्रायल्स से जुड़ी एक आर्म की ओर से रेमडेसिविर की प्रभाविता पर भी काम किया जा रहा है. क्या अन्य दवा कंपनियां इसे बना सकती हैं? एक बार जब हम ये सब जान जाएंगे तब वहां से आगे बढ़ेंगे.”
पहले यह काफी रिपोर्ट हो चुका है कि रेमडेसिविर का इस्तेमाल पहले इबोला महामारी के इलाज के तौर पर नाकाम हो गया था. हालांकि अब इसे नोवेल कोरोनावायरस के खिलाफ इस्तेमाल की कोशिश की जा रही है. यह उस प्रक्रिया को निष्क्रिय करने के लिए डिज़ाइन किया गया है जिसके तहत कुछ वायरस अपनी असंख्य कॉपी बनाते हैं और मरीज के इम्युन सिस्टम पर काबू पा लेते हैं. डॉ गंगाखेडकर ने कहा, “रेमडेसिविर एक ड्रग है जो इबोला महामारी के दौरान इस्तेमाल की जा रही थी. ये ड्रग Covid-19 वायरस के म्युटेशन पर काम करती है, यही वजह है कि रिसर्चर्स को इसके कारगर रहने की उम्मीद है.”
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चीन में पूर्व में रेमडेसिविर ड्रग के साथ हो चुके एक क्लिनिकल ट्रायल से खुलासा हुआ था कि ये इबोला इलाज में इस्तेमाल की गई ये ड्रग गंभीर Covid-19 पर कारगर साबित नहीं हुई. WHO की ओर से समय से पहले चीन के उस ट्रायल के नतीजे जारी कर दिए गए थे. उन नतीजों के मुताबिक मौतों को रोकने और वायरस लोड को कम करने के संदर्भ में रेमडेसिविर दवा का कोई लाभ नहीं दिखा. हालांकि WHO ने जल्दी ही उन नतीजों से जुड़ी अपनी रिपोर्ट को वापस ले लिया था. गिलिएड कंपनी ने उस स्टडी के दावे को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि मरीजों के बहुत कम एनरोलमेंट की वजह से स्टडी को ड्रॉप कर दिया गया था.

