जानें भारत के लोक नृत्य और उनसे जुड़ी दिलचस्प मान्यताएं (pic courtesy: youtube)
नवरात्रि (Navratri 2020) में दुर्गा मां (Durga Maa) को प्रसन्न करने के लिए महिलाएं और पुरुष गरबा डांस करते हैं. कहीं कहीं डंडिया (Dandiya) भी खेला जाता है…
छऊ (Chaau)
यह एक आदिवासी मार्शल आर्ट डांस फॉर्म है. ओडिसा, झारखंड और पश्चिम बंगाल के आदिवासी क्षेत्रों में यह नृत्य किया जाता है. यह धार्मिक नृत्य रामायण और महाभारत से प्रेरित है. चाऊ शब्द संस्कृत के छाया से बना हुआ है. यह डांस फॉर्म तीन भागों में बंटा हुआ है जो मुखौटे के के आधार पर किया जाता है. यह साधारणतः खुली जगहों पर किया जाता है.
कालबेलिया (Kalbelia)राजस्थान का प्रसिद्ध डांस फॉर्म कालबेलिया समुदाय द्वारा किया जाता है. साँपों को पकड़कर इसके जगह का कारोबार कालबेलिया आदिवासी करते हैं. डांस क्र समय साँपों से जुड़े कपड़े ही पहने जाते हैं. इस आदिवासी समुदाय की महिलाएं ज्यादातर इस डांस को करती हैं और UNESCO से भी इसे पहचान मिली है.
संबलपुरी (Sambalpuri)
यह ओडिसा का लोक नृत्य है जो निवेदन करने के लिए किये जाने वाले आंदोलनों में किया जाता है. पुरुष डांसर खुद को बाघ के रंग में रंग लेते हैं. महिलाएं पैरों में लाल रंग की डाई लगाती हैं. यह डांस फॉर्म कई अन्य लोक नृत्यों के साथ होता है जिसमें दलखाई, कर्मा, हुमो, बोली, कोसबडी आदि शामिल है.
चोलिया (Choliya)
यह उत्तराखंड के कुमाऊनी लोगों द्वारा किया जाता है. शादियों में होने वाला यह डांस मार्शल आर्ट की तर्ज पर है. अब यह सिर्फ सांस्कृतिक उत्सवों में ही किया जाता है. शादियों में बुरे साये को दूर करने और आशीर्वाद के लिए इस डांस को किया जाता था.
रौफ (Rouf)
यह जम्मू और कश्मीर का डांस फॉर्म है. प्रकृति के साथ इसके धीमे मूव होते हैं. काव्य गीत चकरी पर दो लाइन में आमने-सामने डांसर होते हैं और इस दौरान वे धीरे-धीरे गाने पर हिलते रहते हैं. शादी और ईद जैसे ख़ास मौकों पर इस डांस को किया जाता है.