उज्जैन। शक्ति की नगरी उज्जैन में आज से गुप्त नवरात्रि की शुरुआत हो गई है। इस बार गुप्त नवरात्रि और भी खास है क्योंकि पुष्य नक्षत्र, हर्षल योग और गजकेसरी योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। बगलामुखी माता मंदिर भैरवगढ़ के संस्थापक रामनाथ महाराज के सानिध्य में यहां विशेष अनुष्ठान किए जा रहे हैं।यज्ञाचार्य पंडित राजेश शर्मा ने बताया कि भैरवगढ़ स्थित बगलामुखी माता मंदिर उज्जैन का एकमात्र ऐसा शक्तिपीठ है जहां मां बगलामुखी के साथ प्रत्यंगिरा भगवती और दस महाविद्याओं का मंदिर एक साथ स्थापित है। गुप्त नवरात्रि में यहां नित्य हवन-पूजन के साथ भारत और विश्व कल्याण के लिए विशेष पूजन अर्चन किया जाएगा।मिर्ची हवन से लेकर शत्रुनाश तक विशेष अनुष्ठानगुप्त नवरात्रि में मंदिर में 3 खास हवन होंगे:1. मिर्ची हवन – नकारात्मक ऊर्जा और शत्रुओं के नाश के लिए2. मनोकामना हवन – भक्तों की मुराद पूरी करने के लिए3. विश्व कल्याण हवन – देश-दुनिया की शांति के लिए4. रात 12 से 4 बजे तक श्मशान साधनागुप्त नवरात्रि तंत्र साधना का पर्व है। उज्जैन में चक्रतीर्थ, ओखलेश्वर श्मशान घाट, विक्रांत भैरव, हरसिद्धि शक्तिपीठ और गढ़कालिका पर भी विशेष पूजन होगा।रामनाथ महाराज ने बताया की कुछ साधक कुल परंपरा से दुर्गा सप्तशती, दुर्गा कवच और देवी मंत्रों का पाठ करते हैं। वहीं कुछ अघोर तंत्र से रात 12 बजे से सुबह 4 बजे तक श्मशान में साधना करते हैं। गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्याओं की साधना का विशेष महत्व है। उज्जैन में शिव-शक्ति की उपस्थिति के कारण यहां सिद्धि प्राप्ति का योग सबसे ज्यादा है।साल में 4 नवरात्रि, 2 गुप्त 2 प्रकटहिंदू पंचांग के अनुसार साल में 4 नवरात्रि आती हैं – 2 प्रकट और 2 गुप्त। गुप्त नवरात्रि में की गई साधना गुप्त ही रहती है और इसका फल कई गुना मिलता है।


