चीन में 31 साल पहले आज ही के दिन हुआ था नरसंहार, ऑर्गेनाइजर ने कवर फोटो में दिलाई याद – Rss mouthpiece organiser recalls tiananmen massacre on cover

  • कई सप्ताह से इस चौक पर चल रहा था प्रदर्शन
  • नरसंहार में मारे गए थे 10 हजार से अधिक लोग

भारत और चीन में सीमा को लेकर चल रही तनातनी के बीच, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के मुखपत्र ‘ऑर्गेनाइजर’ ने अपने कवर पेज पर चीन में चार जून 1989 में हुए नरसंहार से जुड़ी एक फोटो प्रकाशित की है. इस फोटो में चार युद्ध टैंक दिखाई दे रहा है. जिसके सामने एक अकेला युवक खड़ा है. इस फोटो के कैप्शन में लिखा गया है- ”थियानमेन चौक का पुर्नलोकन” यानी कि इस घटना को फिर से याद करना.

चीन की राजधानी बीजिंग के थियानमेन चौक पर 1989 में छात्रों के नेतृत्व में विशाल विरोध प्रदर्शन हुआ था. ये सभी छात्र चीन की कम्युनिस्ट सरकार के खिलाफ एकजुट हुए थे और देश में लोकतंत्र बहाल करने की मांग कर रहे थे. छात्र, कई सप्ताह से इस चौक पर प्रदर्शन कर रहे थे. लेकिन इस प्रदर्शन का जिस तरह से हिंसक अंत हुआ वो चीन के इतिहास में कभी नहीं हुआ था.

थियानमेन आंदोलन क्या है?

चार जून 1989 को चीन में लोकतंत्र की मांग को लेकर थियानमेन चौक जाने वाली सड़कों पर एकत्र हुए छात्रों और कार्यकर्ताओं पर चीनी सेना ने भीषण बल प्रयोग किया था. सेना ने आंदोलन को कुचलने के लिए सड़कों पर टैंक उतार दिए थे. इस सैन्य कार्रवाई में अनेक लोग मारे गए थे. सरकारी आंकड़ों के अनुसार 200 लोग मारे गए और लगभग 7 हजार घायल हुए थे.

हालांकि चीन में मौजूद ब्रिटेन के एक पत्रकार ने दावा किया कि इस नरसंहार में 10 हजार से अधिक लोग मारे गए. लोकतंत्र की बहाली के लिए प्रदर्शन करनेवाले छात्रों के खिलाफ चीनी सेना ने जिस दमनकारी हिंसक नीति का प्रयोग किया, पूरे विश्व में आज भी उसकी आलोचना होती है.

कोरोना कमांडोज़ का हौसला बढ़ाएं और उन्हें शुक्रिया कहें…

कैसे शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन

इस विरोध प्रदर्शन की शुरुआत अप्रैल 1989 में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के पूर्व महासचिव और उदार सुधारवादी हू याओबांग की मौत के बाद हुई थी. हू चीन के रुढ़िवादियों और सरकार की आर्थिक और राजनीतिक नीति के विरोध में थे और हारने के कारण उन्हें हटा दिया गया था. छात्रों ने उन्हीं की याद में एक मार्च आयोजित किया था.

चीन की कम्युनिस्ट सरकार के खिलाफ छात्रों का गुस्सा इस कदर तेज हो गया था कि उसने एक आंदोलन का रूप ले लिया. थियानमेन चौक पर तीन और चार जून, 1989 को सरकार के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हुआ. प्रदर्शन को देखकर ऐसा लगने लगा था कि चीन में नए लोकतंत्र की स्थापना होने जा रही है. लेकिन सरकार के क्रूर रवैये से सब बर्बाद हो गया.

रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रदर्शनकारी उस रात चौक से जाने को तैयार नहीं थे. वहीं सेना के पास सरकार के आदेश को मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं था. चीनी सेना ने बंदूकों और टैंकरों से अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी और शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे नि:शस्त्र नागरिकों का दमन किया.

चीन अपने कदम को आज भी बताता है सही

इस घटना को लेकर पूरी दुनिया में चीन सरकार की काफी आलोचना हुई थी. लेकिन चीनी प्रशासन और सरकार आज भी इस कदम को सही ठहराता है. कुछ समय पहले चीन के रक्षा मंत्री ने थियानमेन चौक पर प्रदर्शनकारियों पर 1989 में की गई कार्रवाई को सही नीति करार दिया था. जनरल वेई फेंगहे ने सिंगापुर में क्षेत्रीय सुरक्षा के एक फोरम से कहा, ‘वह घटना एक राजनीतिक अस्थिरता थी और केंद्र सरकार ने संकट को रोकने के लिए कदम उठाए, जो एक सही नीति थी.’ दुनियाभर के साथी रक्षा मंत्रियों, सेना के शीर्ष अधिकारियों ओर शिक्षाविदों से बात करते हुए वेई ने सवाल किया कि क्यों लोग अब भी कहते हैं कि चीन ने घटना को सही तरीके से नहीं संभाला?

देश-दुनिया के किस हिस्से में कितना है कोरोना का कहर? यहां क्लिक कर देखें

उन्होंने कहा, ‘इन 30 साल में साबित हुआ है कि चीन में कई बड़े बदलाव हुए हैं.’ इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार की कार्रवाई की वजह से ही चीन में स्थिरता आई और विकास हुआ. बीजींग 30 साल पहले छात्रों द्वारा किए विरोध प्रदर्शनों का मुख्य केंद्र था जहां सैकड़ों या शायद 1,000 से ज्यादा लोग चार जून, 1989 को थियानमेन चौक पर सैनिकों के हाथों मारे गए थे.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें

  • Aajtak Android App
  • Aajtak Android IOS




Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here