छत्तीसगढ़ के बैगा आदिवासी समुदाय में शादी की अनोखी परंपरा.
Baiga Tribal Culture: महंगी और आलीशान शादियों के दौर में छत्तीसगढ़ के कवर्धा में बैगा आदिवासी समुदाय की परंपरा नजीर है, जहां गांव के मेले में युवा अपना जीवन साथी चुनते हैं. मेहमानों के खाने-पीने का इंतजाम उसी गांव के लोग करते हैं, जहां यह खास आयोजन किया जाता है.
पारम्परिक परिधानों में कर्मा नृत्य के साथ होने वाला यह खास आयोजन बैगा आदिवासी समुदाय की पहचान है. खासकर शादी करने की चाहत लेकर आने वाले युवक और युवतियों को तो इस मेले का इंतजार रहता है. स्थानीय बैगा रामस्वरूप बताते हैं कि इस मेले में आकर ही युवा अपना जीवन साथी चुनते हैं, जिसके साथ वे पूरा जीवन बिताते हैं. उन्होंने बताया कि इस मेले के आयोजन की जानकारी समाज के लोगों को पहले दे दी जाती है, ताकि सभी तैयारी के साथ आएं. जिस गांव में मेला लगता है, वहां के लोग मेहमानों के खाने-पीने का इंतजाम करते हैं.
शहरों में थीम-मैरेज या महंगे होते शादी समारोहों के दौर में बैगा आदिवासियों का ये रिवाज दूसरों के लिए नजीर की तरह है. कहने को तो बैगा समुदाय पिछड़ी जनजाति वर्ग में आता है, लेकिन तथाकथित सभ्य समाज के लोगों के लिए ऐसी परंपराएं उदाहरण हैं. जहां शहरों में शादी के लिए लाखों रुपए खर्च किए जाते हैं. भोजन की बर्बादी होती है. ऐसे में बैगा समाज गांव में ही ये परम्परा निभाते हैं और आपस में चंदा कर भोजन की सामग्री जुटाकर शादी करते हैं.

