इंटरनेटी काव्य-धारा नदिया के बाढ़ आय कस तेज धार अउ रफ्तार से परगट होवत हे. फेस बुक/वाट्सअप म कविता झरना बरोबर झरत हे. योगासन मुद्रा म कवि कविता-भ्रामरी प्राणायाम करत हे.ये साहित्य म नवा परयोग आय.’
लेड़गादास किहिस- ’कोरोना काल म अचानक कवि लेखक मन के थोक उदगम होवत हे.’ कतको साहित्य-शिरोमणि होगे. अपन नाम न छापे के निवेदन के साथ एक अखबार ल बहुरंगीलाल किहिस- ‘आजकल कोरोना काल के ख़ास सरकारी अवकाश हे. कलम फ्री चलत हे. रोज महान कोरोना-साहित्य के जनम होवत हे. खुद लेड़गादास ‘कोरोना चिंतन-सार’ नामक ग्रन्थ लिख चुके हे. लाकडाउन के सम्मान ओमा ‘घरे म राहो, मास्क लगाओ, दु गज दूरी’ बनाव, आदि एक राष्ट्रीय स्तर के प्रकाशन संस्थान म जारी हे.’
लेड़गादास किहिस- ‘प्रकाशन राष्ट्रीय स्तर के हे एखर ले मोर मनोबल बाढ़गे हे. सरकारी खरीद चुटकी बजात हो जही. आखिर कोरोना साहित्य ताजा हे. लोगन के मन म कोविड -19 ल लेके भारी जिज्ञासा हे.’ बहुरंगीलाल ल कविता-वविता वइसे तो समझ म नइ आय. फेर तीर म तुक्का चला लेथे. वो किहिस-‘इंटरनेटी कवि–सम्मेलन जिंदाबाद हे. इंटरनेटी काव्य-धारा नदिया के बाढ़ आय कस तेज धार अउ रफ्तार से परगट होवत हे. फेस बुक/वाट्सअप म कविता झरना बरोबर झरत हे. योगासन मुद्रा म कवि कविता-भ्रामरी प्राणायाम करत हे.ये साहित्य म नवा परयोग आय.’
छत्तीसगढ़ी में पढ़ें: जुगाड़, बिन पेंदी के लोटा, तेमा अंगरा ला भरके अस्तरी चलालेड़गादास आजकल आन लाइन रहिथे. छत्तीसगढ़ म शिक्षा विभाग के चिमटा गवांगे रिहिस. खूब खोजबीन होइस. कोरोना काल म चिमटा गंवाना विभागीय अशुभ लच्छन माने जात रिहिस. एक दिन अचानक लेड़गादास ल गंवाय चिमटा विभाग के दुआरी म मिलिस. लेड़गादास ओला लेके अधिकारी महाशय के कार्यालय म परगट होइस. चिमटा मिले के खबर पाके अधिकारी महाशय गदगद होगे. आखिर कोरोना काल म कुछ तो बुता होना चाही न. जनता खुश रही, नेता खुश होहीं. सरकार के आघू चिमटा तो बाजे. लेड़गादास ल अधिकारी महाशय किहिस शिक्षा म अब कुछ नाच-गम्मत होना जरूरी हे.
लेड़गादास किहिस-‘चिमटा मिलते साठ झट अधिकारी महाशय वो चिंमटा के नामकरण संस्कार करिस “पढ़ई तुहंर दुआर. ’अउ बतइस के ये सरकारी चिमटा कोरोना-काल के पवित्र देन आय. अउ शुरू होइस पढ़ई दुआर–दुआर (दरवाजा–दरवाजा) अखबार म खूब छपाछप होवत हे. अउ का होना? शिक्षा –विभाग के दार-भात चुरना चाही बस.कोरोना-काल के एक अध्याय पुरगे. विद्वान मनखे एला शिक्षा के नवाचार कथें.
बहुरंगीलाल किहिस – ‘छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग म पोंगा-प्रवेश होगे. पोंगा पढ़इ चलत हे. धन्न भाग लेड़गादास, तोला लिखे बर फटाफट विषय तो मिलत हे. ’लेड़गादास के नाम हरू रिहिस तेंन गरू होवत हे. एक दिन लेड़गादास बड़ जोर से झल्लइस किहिस– ‘ए मन ल हर कार्यक्रम बर कोतवाल चाही. अउ हांका राजधानी तक सुनाय. एक दिन लेड़गादास अपन मितान बहुरंगीलाल ल बतइस के शिक्षा म पोंगा के नवा अध्याय जुड़गे हे. मोहल्ला म पोंगा बजाव पढ़ई कराव. इही चलत हे. बहुरंगीलाल किहिस-‘मोहल्ला-पोंगा जिंदाबाद हे. अउ हर पंचायत पोंगा क्षेत्र म आगे.
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अब पोंगा गाँव–गाँव म बाजना शुरू होगे हे. ध्वनि परदूसन के परवाह सरकार कब करिस? सरकार ल अपन फेस चमकाय ले फुरसत नइ मिले? पोंगा के जोर–सोर ले नवा इतिहास बनत हे. बीच म लालबुझक्कड आ टपकिस. वोहा लेड़गादास के खूब प्रशंसा करिस. किहिस– ‘सरकारी दरबार म अपन गोटी फिट कर पाना सब के बस के बात नइ होय. वुहाँ लेवना–लगाय (नवनीत–लेपन) करे बर परथे. भई लेड़गादास तेंहां जोंन बुता करे हस तेखर सेती तोर नाव त चतुर सुजान होना रिहिस.” लेड़गादास जोर से हाँसिस फेर किहिस –‘लइका मन का पढ़त हें एखर ले कोनो ल मतलब नइ हे.
ये डहर चरवाहा/बरदिहा के गौठान दूसर डहर स्कूली पोंगा पोंगियावत हे.सब क्षेत्र म जय छत्तीसगढ़ होही. लालबुझक्कड हाँसत-हांसत किहिस-‘ खबर त यहू हे के अमेरिका के राष्ट्रपति के नजर छत्तीसगढ़ के गोबर अउ पोंगा एजुकेशन-उपर हे.’ लेड़गादास किहिस –‘मय गोबर के प्रशंसनीय परयोग अउ शिक्षा म छत्तीसगढिया पोंगा-‘विषय म किताब लिखत हवंव.’ लालबुझक्कड किहिस –‘एखर ले तेंहा राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय लेखक हो जबे.कोरोना तोर बर वरदान होही.’तीनों सज्जन कोरोना–काढा पी के मस्त होगें.

