छत्तीसगढ़ी म पढ़व- धन-धन माता लिंगेश्वरी देवी तोर


धन हे छत्तीसगढ़, तोर महिमा अपरम्पार हे. नइ पावय कोनो तोर ओर-छोर. तभे तो भगत मन गाथे- तोर महिमा कतेक बखानव ओ मोर छत्तीसगढ़ मइया. तोर कोरा (गोदी) म लाखो मनखे पलत हे, जीयत खात हे. कहां कहां के मनखे नइहे इहां, तीरथ धाम बनगे हे छत्तीसगढ़ अउ जघा तो अइसे हे जिहां देवी-देवता, महात्मा, मंदिर मन के दरसन करथे अउ अपन-अपन जघा घर दुआर मं लहुट जथे फेर छत्तीसगढ़ अइसे वरदानी भुइयां हे, सती अनुसुइया जइसन तपस्वी भुंइया हे जेकर परताप मं ब्रम्हा, बिसनु अउ महेश जइसन देवता ओकर वश हो जथे. अइसन मोहिनी मइया हे. बिन मांगे सबो कुछ मिल जथे. पता नहीं मांगही तब मोरध्वज दानी राजा कस का नइ लुटा दिही.


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