छत्तीसगढ़ी म पढ़व- सबो डहर ला देखे ला परथे तभे बनौकी बनथे”

केहे के बात सिरतोन पतियाबे का अतक बड़ समाज हे तेमा रिकिम – रिकिम के मनखे हावंय अउ उहू मा अपन नाव के गौंटियाई करना सबो झन ला बने लागथे. बने लागे बर मन ला संतोसी राखना जरूरी हे. कहईया का कहना चाहत हे तेला बने धियान के सुनना जरूरी हे. धियान राखत रहिबे तभे तो काली जुवर तोर सियानी चलही. सियानी करइया के मीठ बोली सबो कोती सराहना पाथे अउ सिरतोन मा पतियाए के मन लागथे.

कोनो मेरन रहिबे तोर सन्मान होहिच

ओ दिन के बात ए अइसे कहना अउ समाज मा अपन जगा बनाना आज के जमाना मा जरूरी होगे हे. समाजिक बेवस्था के ताना बाना बुनइया मनखेच मन होथें. मनखेच के चारों मुड़ा रंग रंग के संसार देखे सुने बर मिलथे. उपस्थिति कराके के कलेचुप हो जाना बने नइ लागय. तोर अंतस मा का चलत हे तेला तीहिच जानबे फेर ओला जनवाय के कोसिस हमन ला नइ करना हे. भल ला भल कहईया ला अंगरी मा गिने जा सकत हे बस अतके बिचार सबो जगा दिखना चाही के हमर अपन संगे संग सबो के सन्मान बने राहय.

कहिनी केहे असन काबर लागथे

सुनइया मन मा एक झन हुंकारू देवइया होना जरूरी हे. हहो कहत रहिबे त सरलग सबो बात हा एक दूसर ले संघर के रेंगत हे तइसे लागही. अचम्भा के बात हे के कहइया अउ सुनइया आपस मा अइसे घुल मिल जाथें के सबो बात हा फरी फरा जाने बूझे असन लागथे. बिचार सबो झन मेरन अपनेच सेती होही अइसे नइ लागय काबर के बिचारे मा कतकोन बात अपन आप मा घटाए बढ़ाए बर धर लेथे तेकरे से अइसे गोठ बात होतेच राहय तेमा संदेस बगरय.

(मीर अली मीर छत्तीसगढ़ी के जानकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

Tags: Articles in Chhattisgarhi, Chhattisgarhi, Chhattisgarhi Articles


Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here