पतियाए रेहे तभे आजो निभाव होवत हे
आगू कोन बाढ़गे अउ कोन पाछू डाहर पछुवागे. आज के सोंचे मा अब कांही नइ धरे हे. सबो झन अपन मिहनत क ले आगू पाछू ला कभू नइ सोंचे सकंय. परिया परे खेती खार के चिंता किसान नइ करही ते कोन करही. सुकाल दुकाल के सेती आगू पाछू होनच परथे. सरग भरोसा रेहे मा बरसा के मुंह ला ताकत राह. बने बरसगे ते बने बने नइते फेर का करे सकत हस. आज काल किसानी छोड़के आने काम करइया मन शहर कोती के डहर ला रोज नापत हें. कोनो ठिनठिनी गाड़ी मा नइते कोनो फटकटी ढंगाएच मिलही. फेर खेती अपन सेती अइसे कहिके लगे रेहेन अउ निभाव करतेच रेहेन तभे तो आजो शहर ले गांव लहुट के आना परथे. निभाव करना हे ते अपन पुरखउती मा लहुटनाच परही.
ओदरी अउ एदरी मा का फरक हे
रास ला कुढ़ोके कलारी ला धरे धरे एक भांव किंदरके बता देथे के ओदरी अउ एदरी मा का फरक हे. कमिया ओतकेच कमाईन. सबो पूंजी पसरा ला साल के साल धरती माता के जतन करे मा लगाइन. कतका हरियर होगे महतारी के कोरा अउ ओकर जतन करइया के मन कइसे हरियागे एला कथें ममता के दुलार. तें करबे तभे पाबे. सबो किसम के धूप छांव ला भोगत रहिबे तभे तो तोला अपन परिवार बर सुख मिलही. काखर सेती कोन खटावट हे तेला आज तक कोनो अपन बिचार मा नइ नाने सकय. सब होवत आवत हे. मन ला मढ़ाए बर केहे जाथे के देख मोर सेती कतका सुख ला भोगत हे. फरक करबे त फरक दिखथे नइ ते एहू दरी सब ओइसनेच हाबय.
पलथिया के जेवन पानी जेंवत रा
सुखरू के जिनगी मा बस एके सपना हे के घर जिनगी बने चलत रहय अउ एक मुठा चांऊर बर कोनो झन लुलुवावंय. सबो झन के सोंचइया ला फुरथे घलो. अन्न कुंवारी के मान सम्मान होना जरूरी हे. तभे तो बने पलथिया के धरती माता के कोरा मा बइठे जेवन पानी जेंवत खावत चलत अउ फभत हे. अलकरहा जेंवई घलो बने नोहय तेला सबो जानत हे. दिन बादर के संसो करत कतको योजन के चिंता आज के विज्ञानी मन रोजेच कर डारथें. तें केहे नइ पाए झोंकइया सुन डारे हे तइसे लागथे. कतका सुख अउ होही ए संसार मा तेला खोजइया खोजतेच हावय अउ पावत घलो हावय. फेर चरदिनिया झन होवय.
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झुके अउ रुके मा काकरो नइ बिगड़य
चलन के सेती कई पईत आंही बांही झांके बर पर जथे. आदमी भोरहा खा जथे अउ निटोरे असन करे ला धर लेथे. आज देखले एक मुठा मा संसार हावय. पहली पसर भर मा नइते ठोम्हाभर मा नइ अमावत रिहित तेन मुठा भर मा अमागेहे. थोरको कांही जनवाना हे ते तुरतेच जनवाले तेखरे सेती नियाव के हिसाब करइया कोती सबो के धियान रहना चाही. हियाव करइया ककरो बिगाड़ होही अइसे नइ सोंचय चार झन ला पतियाके चलना आज के मांग होगे हे अइसे होना जरूरी हे.

