छत्तीसगढ़: आरक्षण की आंच में कौन झुलसेगा? हाई कोर्ट के फैसले से बढ़ा सियासी बवाल

हाइलाइट्स

रमन सिंह सरकार ने 2011 में आदिवासियों का आरक्षण 20 से बढ़ाकर 32 किया था.
हाई कोर्ट के फैसले से आदिवासियों का आरक्षण फिर 32 से घटकर 20 प्रतिशत हुआ.
भाजपा इसके लिए कांग्रेस को जिम्मेदार मानती है, कांग्रेस ने रुख स्पष्ट करने को कहा.

रायपुर. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में आदिवासी आरक्षण (Tribal Reservation) पर हाई कोर्ट के फैसले के बाद राजनीति गर्म हो गई है. इसको लेकर बीजेपी (BJP) के आदिवासी नेताओं ने अक्टूबर में दुर्ग, सरगुजा और बस्तर संभाग में नेशनल हाइवे जाम करने का फैसला किया है. बीजेपी आदिवासी आरक्षण के लिए कांग्रेस (Congress) को घेरने के लिए बड़ी रणनीति बना रही है और दूसरी तरफ कांग्रेस ने इसे भाजपा का नाटक करार दिया है और रुख स्पष्ट करने के लिए कहा है.

बता दें कि बिलासपुर हाई कोर्ट ने प्रदेश में रमन सिंह सरकार द्वारा लागू किए गए 58 प्रतिशत आरक्षण को रद्द कर दिया है. ये मामला 2011 में सरकारी नियुक्ति सहित अन्य दाखिला परीक्षा में आरक्षण से जुड़ा है. इस मामले में हाई कोर्ट ने 50 प्रतिशत से ज्यादा आरक्षण के असंवैधानिक बताते हुए आरक्षण को रद्द कर दिया. इसके बाद छत्तीसगढ़ में वर्गवार आरक्षण की स्थिति पूरी तरह से बदल गई है.

दरअसल, छत्तीसगढ़ में साल 2012 से एसटी को 20, एससी को 16 और ओबीसी 14 प्रतिशत आरक्षण मिलता था. लेकिन, रमन सरकार ने एसटी के आरक्षण को 20 से बढ़ाकर 32 कर दिया और एससी के आरक्षण को 16 से घटाकर 12 कर दिया था. मामला हाई कोर्ट तक पहुंचा और करीब दस सालों तक चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने रमन सरकार के निर्णय को असंवैधानिक करार दिया.

आदिवासियों का आरक्षण 32 प्रतिशत से घटकर 20 प्रतिशत हो गया है. इस लिए आदिवासी समाज इससे नाराज है. वहीं, बीजेपी कोर्ट के इस फैसले के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार बताते हुए अब सड़क की लड़ाई का ऐलान कर दिया है. भाजपा ने छत्तीसगढ़ में 3 संभागों के नेशनल हाइवे जाम करने की घोषणा कर दी है.

भाजपा ने आगामी 8 अक्टूबर को प्रदेश के तीन संभाग में चक्का जाम करने का ऐलान किया है. वहीं, 13 अक्टूबर से कांग्रेस के आदिवासी विधायकों के घरों का घेराव और दीपावली के बाद रैली के माध्यम से सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करेगी. बीजेपी के इस ऐलान को सीधे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आड़े हाथों लेते हुए पूरे मामले में बीजेपी का स्पष्ट रूख पूछा है. जबकि भाजपा के वरिष्ठ नेता संजय श्रीवास्तव ने कांग्रेस सरकार को फिर से धोखेबाज कहा है.

बहरहाल, आरक्षण को लेकर कोर्ट के फैसले के बाद ही आरक्षण की आंच छत्तीसगढ़ में सुलगने लगी है; और यह धीरे-धीरे बढ़ भी रही है. वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक आर. कृष्णादास मानते हैं इस इस मामले में सत्ताधारी दल को आदिवासियों को समझाने में थोड़ी कठनाई होगी क्योंकि वे कानूनी नहीं बल्कि व्यावहारिक भाषा ज्यादा समझते हैं.

बता दें कि छत्तीसगढ़ में आने वाले साल में विधानसभा का चुनाव होना है. ऐसे में यह मुद्दा कितना बड़ा बनेगा यह तो वक्त ही तय करेगा. लेकिन, हाई कोर्ट के फैसले ने फिलहाल छत्तीसगढ़ की राजनीति को बेहद गर्म कर दिया है क्योंकि भाजपा और कांग्रेस, दोनों ही पार्टियां इस मुद्दे में अपना वोट देख रही हैं.

Tags: Chhattisgarh news, Raipur news


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