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छत्तीसगढ़ विधानसभा में एक दिन का विशेष सत्र बुलाया गया था, जिसमें कांग्रेस के विधायकों ने जमकर हंगामा किया. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में एक-तिहाई आरक्षण देने का प्रस्ताव पेश किया, जिसे परिसीमन के बाद लागू करने की मांग की गई. बाद में विपक्ष ने सदन का बहिष्कार किया.

छत्तीसगढ़ विधानसभा में एक दिन का विशेष सत्र
Chhattisgarh Vidhansabha: छत्तीसगढ़ विधानसभा में महिला आरक्षण को लेकर एक शासकीय संकल्प पारित किया गया है. शासकीय संकल्प में परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद लोकसभा और सभी विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण को तत्काल लागू करने का आग्रह किया गया है. 33% महिला आरक्षण पर करीब 10 घंटे से ज्यादा समय तक बहस हुई. इसमें सत्तापक्ष और विपक्ष ने एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप भी लगाए. शासकीय संकल्प के विरोध में विपक्ष ने सदन का बहिष्कार किया और विपक्ष की गैरमौजूदगी में शासकीय संकल्प पारित हुआ. बताया जा रहा है कि विधानसभा का आगामी सत्र जुलाई के दूसरे हफ्ते में संभावित है.
विधानसभा में क्या बोले मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय?
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शासकीय संकल्प पर कहा कि केंद्र सरकार नारी शक्ति वंदन संशोधन अधिनियम लाई. महिलाओं को आरक्षण देने के लिए बिल लाया गया. विपक्ष ने परिसीमन को लेकर बिल का विरोध किया. परिसीमन होता, तो क्षेत्र बढ़ता और ज्यादा लोगों को मौका मिलता.
सीएम साय ने कांग्रेस पर साधा निशाना
सीएम साय ने कहा कि मैं रायगढ़ से चार बार सांसद रहा, 350 किलोमीटर का क्षेत्र है. एक सांसद दिन रात भी घूमेगा, तो सभी जगह जा नहीं सकता है. परिसीमन होता तो क्षेत्र बंटता, विकास भी होता लोग वहां तक जाते. जहां तक श्रेय की बात है. पीएम ने कहा था कि श्रेय आप ले लीजिए. प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने बड़ी सरलता से अपनी बात रखी. विपक्ष ने परिसीमन, जनगणना की बात को लेकर विरोध किया. इसके लिए देश और प्रदेश की जनता आपको कभी माफ नहीं करेगी.
उन्होंने कहा कि आज भी समय है संकल्प सर्वसम्मति से पारित करेंगे तो आक्रोश कम हो सकता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जितना महिलाओं के लिए काम किया. कांग्रेस ने पांच दशकों में उतना काम नहीं किया. जनजातीय समाज की बहन द्रौपदी मुर्मू को सर्वोच्च पद पर आसीन कराया है.
नेता प्रतिपक्ष ने विशेष सत्र को बताया गैर जरूरी
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने कहा कि सदन के बाहर विपक्ष के निंदा की बात कही गई थी. शासकीय संकल्प की बात नहीं थी. विधानसभा का विशेष सत्र गैर जरूरी है. उन्होंने कहा कि यह सभी राज्यों में विवाद की जड़ है. पता था समर्थन नहीं मिलेगा, तो विधेयक लाने की जरूरत क्या थी. अगर विधेयक पास नहीं हुआ, तो किसकी गलती है. क्या यह संसद का निर्णय था या कांग्रेस का निर्णय था. अगर संसद का निर्णय था, तो क्या संसद की निंदा कर रहे हैं. अगर 2023 के विधेयक को लागू कर देते, तो आरक्षण मिल जाता.
नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत के जवाब देते हुए बीजेपी विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि अहम संकल्प पर चर्चा हो रही, अपने तरीके से अपना पक्ष रखा. महिला की स्थिति पर कांग्रेस ने कभी चर्चा नहीं की. अंबेडकर के साथ कैसा व्यवहार कांग्रेस ने किया, सब जानते हैं.
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गोविन्द सिंह जनवरी 2026 से देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान नेटवर्क 18 ग्रुप में बतौर Senior Sub Editor कार्यरत हैं, जहां वह मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ स्टेट टीम का हिस्सा हैं. किस्सागोई के अंदाज में खबरें पेश कर…और पढ़ें
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