छत्‍तीसगढ़ी में पढ़ें: छत्तीसगढ़ के नारी के गहना गुरिया अउ चाँदी सोना मा बने सिंगार के जिनिस | kawardha – News in Hindi

त्तीसगढ़ के पुरखा मन इहाँ के नारी के सिंगार बर प्रांत के रहन सहन रीत रिवाज के हिसाब ले पहिरे ओढ़े के जिनिस बनाय हे जौन नारी ला प्रकृति ले जोड़े रखथे अउ धीरज सिखाते,परिवार बर समरपन सिखाथे.परब,तीज तिहार, मड़ई मेला मा जब किसनहीन,  बनिहारिन सोला सिंगार कर निकलथे तब ओखर रुप उर्वशी ला फेल कर देथे.

अइसे तो नारी अउ पुरुष दूनों अपन रुप ला सिंगारे अउ सजे सँवरे के उदीम आदिकाल ले करत चले आवत हे. फेर एमा नारी मन के सजे सँवरे के सँउख पुरुष मन ले कतको जादा हे. नारी मनके सोला सिंगार के बात कहे जाथे. गोड़ के अंगरी ले मुड़ी के खोपा तक नारी मन सिंगार करथे. कहे जाथे नारी के सोला सिंगार करे ले सुख अउ उन्नति घर मा आथे. सिंगार हा पबरित अउ उजास बर करे जाथे तब मया अउ प्रीत बाढ़थे अउ एक सुग्घर समाज के रचना होथे.

छत्तीसगढ़ के नारी मन तीन किसम के सिंगार करथे. एक तो लुगरा पाटा पोलका पहिरथे, दूसर बिहाता के सिंगार अउ तीसर गहना गुरिया. छत्तीसगढ़ के नारीमन के लुगरा पाटा पहिरे के तरीका हा पाँच किसम के हवय. चारो मुड़ा ले अलग अलग प्रांत ले जुड़े अंचल मा उन प्रांत के पहिरावा मिंझर जाथे. महाराष्ट्र ले लगे छत्तीसगढ़िन मन धोती रुप मा लुगरा पहिरथे.उत्तरप्रदेश डहर के नारी मन अलगा लेके, उड़ीसा खार ले लगे मन सोला हाथ के अउ आन्ध्रप्रदेश ले लगे बस्तर अंचल के मन पाटा डार के. छत्तीसगढ़ के बीच मा रहइया छत्तीसगढ़िन मन अलफी डार के पहिरथे. फेर अब टीवी, फिलिम, सिनेमा के आय ले सबके पहिरावा वइसनेच होगे हवय.

दूसर किसम के सिंगार मा छत्तीसगढ़िन बिहाता नारी मन सेंदूर, टिकली, चूरी, नखपालिस, माहुर , मेंहदी, काजर, फूलगजरा, कंघी, दावना पान, पाँख, ममहाती तेल ,कउड़ी ला पहिरथे अउ अंग मा लगाथे. जइसे लुगरा के पहिरई हा प्रांत मन के तीर मा रहइया नारी के सिंगार मा मिंझरथे वइसने यहू सिंगार मन मिंझर जाथे.तीसर किसम के सिंगार गहना गुरिया हरय. गहना गुरिया सोन चांदी के बने रहिथे. एखर पहिरे के अंग ला  तीन भाग मा बाँटे जा सकथे. पहिली मुड़ी से घेंच तक, दूसर बाहँव ले कनिहा तक अउ तीसर गोड़ मा. मुड़ी ले घेंच तक पहिरे के गहना गुरिया मा छत्तीसगढ़हीन नारी हा बेनी मा खोंचे के चांदी के पिन, बेनीफूल पहिरथे. माथा मा माघा, माँग टीका सजाथे. नाक मा सोनहा फूली, छाता फूली, नथनी, नागमूरी, बुलाक, पहिरथे. कान मा सोन के खिनवा, करनफूल, झुमका, पहिरथे. घेंच मा दुलरी, तीलरी, चांदी के रुपिया माला, पुतरी, गरमाला, सूँता पहिरथें. हाथ के बाहँव मा पहुँची, हाथ के नारी मा अँइठी, बनुरिया, पटटा, अउ अँगरी मा मुँदरी पहिरथें. कनिहा मा चांदी के 3-7 लर के करधन पहिरथे. गोड़ के घुठवा मा  साँटी, पायल, लच्छा, डोड़ा, पहिरथें. गोड़ के अँगरी मा नारी मन बिछिया पहिरथे.

नारी मनके सिंगार सिरिफ सिंगारेच के जिनिस नोहय एखर पाछू पुरखा मन के बनाय नियम ला वैज्ञानिक मन नारी के निरोगी काया बर बनाय के जिनिस पाइन हवे. बिछिया हा ब्लड प्रेसर ला बने बने राखथे. पायल ,साँटी हा जोड़ जोड़ के हाँड़ा के पीरा ला दुरिहाथे. कनिहा के करधन हा कोख ला समरथ बनाथे अउ मोटई ला रोकथे. पैती अँगरी के मुँदरी हा मति ला पबरित अउ स्वस्थ राखथे.बाँह के पहुँची हा लहू के दउड़ान ला ठीक करथे अउ ताकत बढ़ाथे. कान के करन फूल अउ झुमका हा एक्युपंचर के काम करथे. माँगटीका, टिकली अउ सेंदूर हा आज्ञाचक्र ला चलायमान करथे.

छत्तीसगढ़ हा गरीब, आदिवासी अउ जंगल के झाड़ झरोखा वाला प्रांत आय. इहा के रहइया नारी मन प्रकृति के कोरा मा रहिथे. अपन कम आमदनी मा माहँगी सिंगार के गहना गुरिया नइ बिसाय सकय तब तीर तखार के जिनिस ला सिंगार के रूप मा बउरथे. जंगल के बीच मा रहइया विशेष पिछड़ी जाति कमार भुँजिया, भतरा, उराँव, परधान, देवार जइसन जाति के नारी मन प्रकृति के फूल , पान , चिरई चिरगुन पाँख के सिंगार के जिनिस बनाके पहिर लेथे.

आज नेवरिया जमाना मा पढ़े लिखे बहू बेटी मन ये गहना गुरिया ला छोड़के टी वी सीरियल अउ फिलिम के हिरोइन मन के नकल करके अपन पुरखौती सिंगार ला बिसरावत हे एकरे सेती ओमन ला  किसम किसम के बिमारी हमावत हे.जुन्ना सियान मन कतको बरजथे तभो उनला अनपड़, अंधविश्वासी कहिके चुप करा देथे अउ अपन पाँव मा कुदारी मारथे.




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