छत्‍तीसगढ़ी में पढ़ें : पुचकारिस ततके मा जान डारिस | kawardha – News in Hindi

अतका अजमाइस करे के बाद मानुस चोला जनम धरइया के आंखी उघर जाना चाही.

कुछु झन कह फेर एक कन , मया करके निहार दे, ततके मा तोर काम बुता बन जाही.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    October 2, 2020, 11:22 AM IST

इला जोड़ी फंदाये हे. गाड़ी रच – रच ले लदाए हे. टेकनी ला गड़हा टारिस ततके मा गाड़ी रेंग परिस. एला आपमन चलचित्र जान के पढ़व के कइसे जानवर मन अपन आदत व्यवहार ले अपन मालिक के इशारा ला समझथे. होर – होर कहथे ततके मा ओला रुक जाना हे. सुमेला , जोता के बंधना के घलोक अपन जगा हे. कोन जानवर हा बहिरहा हरय अउ कोन हा भितरहा. भारी अजम करे के बात हरय. अपन – अपन जगा मा जाके खड़ा हो जथें. बइला ला नाथे के परंपरा हे. ताकि डेरी , जउनी जेन डाहर मोड़ना हे कांसड़ा ला तीरके मोड़े जा सकत हे.

कई पेत चढ़ऊ परथे त जानवर तीरत – तीरत मड़िया जथे. अपन पूरा ताकत ला लगा देथे तभो नइ तिरावय. अतके बेर गड़हा कहुं पुचकार दिही ततके मा काम बन जथे. पुचकारत, पुचकारत कहना परगे ए काए जी तोर बर , एखर ले पहिली कतको बेर उधेनत लेगे रेहे आज का होगे तोला, चल फेर बने दाना पानी के बेवस्था होही. सुने बात ए कहिके कतको झन पतियावय नइ. फेर जेन हा साक्षात् अनुभव करे हे तेने जानथे के बिना मुंह के जानवर कतका समझदार होथे. ये अपन आंखी म देखे सच्चाई हरय.

एक कन पुचकार के बाखा ला अइसे करके हाथ मा सार देबे नहीं ततके मा ओहा अपन मालिक के नमक ला छूट देथे. पशु योनि मा जनम धरे हे तेनो कतक वफादार होथे एला जानना हे हमन ला अपन डहर के मानव होए के प्रमाण देना परही. मानव योनि पाके कतको झन अपन स्वभाव ला बनाके राखते अउ कतको झन बनाए के उदिम घलोक नइ करंय. हमला का करना हे कहिके ए संसारी अपन जिनगी जियत नरक ला भोग डारथे अउ दूसर ला दोष देय मा थोरको नइ लजावय.

एकरे सेती सियान मन के चाल – चलन , बातचीत , आदर व्यवहार ला पीढ़ी दर पीढ़ी चलाते रहना चाही. समाज मा माहौल मा जीना चाही. समाज मा रहिबे चाहे घर – परिवार मा सब्बो जगा ऊंच- नीच होइस के नइ होइस ते नइ जान सकस , फेर बिना जाने – सुने अपन निरनय नइ करना चाही.दुनिया मा चौरासी लाख योनि हावय कइथें. फेर कोन योनि मा काला का भुगतना हे तेला कोनो नइ जान सकय. ऊपर वाला के लीला अपरंपार हे. आज तक ले कोनो नइ जानिन के ए दुनिया के चलाने वाला कोन हे. चलाने वाला के बारे में सोच के देख कोनो मेरन रत्ती भर फरक नइ परय अउ दुनिया चलतेच जाथे. अभी तक कोनो नइ जान पाइन के अन्न – पानी के देवइया अपन बर का करत होही. जानत सब्बो ला हे फेर अनजान बनके रेहे रइथे तइसे लागथे. जीव – जंतु , पणकी परेवा सब्बो अपन जगा मा आजो मिल जथें. बिहनिया – संझा के ओ मन ला अजम रइथे. अपन रद्दा आ अपन रद्दा जा बस अतके ऊन्खर संसार हे. कोनो किसम के दुख पा जथे त प्रकृति हा ऊंखर सेवा करथे. इही प्रकृति ला हमन भगवान कथन. भगवान सब्बो जगा हे केवल अनुभो करे के बात हे.

अतका अजमाइस करे के बाद मानुस चोला जनम धरइया के आंखी उघर जाना चाही. काबर के बुद्धि मा सबले सबल प्राणी ओही हरय. मानुस तन हा सब्बो किसम के झेल ला सहिथे अउ सहाथे घलोक. ए जगा एके बात केहे जा सकत हे के कलजुग मा घलोक अपन करम के कारण मानुस चोला अपन धरम के रक्षा करत मानवता के पुजारी हो सकत हे. अपन सेती नइ पर के सेती घलोक सोच विचार ला पबरित करना परथे , तभे जीवन के सार का ए पता चलथे. बने करम करबे ते तोर जाए के बाद भी तोर नाम होही. डीह मा दीया बरइया घलोक तोर नाव लेके अपन जिनगी ला संवारत रेंगही अउ रेंगाही.




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