एकरे सेती सरलता अउ तरलता बर अपन भाखा मा विचार करना अउ परोसना आज के मांग हे.
माई भाखा हा हमर संस्कृति अउ संस्कार मा रचे बसे रइथे. कोनो प्रांत के भाखा होवय ओखर विकास बर घर परिवार ले लेके समाज में योगदान होथे.
- News18Hindi
- Last Updated:
September 30, 2020, 3:27 PM IST
बालपन मा खेलई -कूदई के जादा मौका मिलिस अपन – अपन ले नवा -नवा किसिम के खेल उद्गारे गिस अउ खेल शुरू होगे. ए मेरन एक बात ला समझना हे के भाषा अउ केवल भाषा छत्तीसगढ़ी के भरपूर प्रयोग हुइस . सब्बो लइका अपन माई भाखा मा अतेक निपुन दिखिन के का पूछबे मन गदगद होगे. भाषा के सरलता के सरलग विकास माई भाखा मा दिखथे. अतका जल्दी अउ सुन्दर ढंग ले अपन माई भाखा मा मनखे अपन विचार प्रकट करथे के ओला पता नइ चलय अउ काम बन जाथे.
केहे के मतलब साफ हे के माई भाखा हा हमर संस्कृति अउ संस्कार मा रचे बसे रइथे. कोनो प्रांत के भाखा होवय ओखर विकास बर घर परिवार ले लेके समाज में योगदान होथे. नानकुन आठ साल के लइका उहू हमर छतीसगढ़ के तऊन हा तीन भाषा मा अपन विचार प्रकट कर सकत हे त भाषा के समस्या इहां कहां हे. समस्या हे त केवल प्रयोग मा. प्रयोग करइया मन अपन विचार ला अपन भाखा मा अच्छा से परोस सकत हे लेकिन संकीर्णता उनखर मन के विचार ला आगू नइ आवन देंवय. एकरे सेती सरलता अउ तरलता बरअपन भाखा मा विचार करना अउ परोसना आज के मांग हे.

