छत्‍तीसगढ़ी विशेष: घर कुरिया, खेती किसानी, बारी बखरी मा समाय लकड़ी लोहा के जिनिस | kawardha – News in Hindi

त्तीसगढ़िया मनखे अबड़ गुनवान अउ बुधियार होथे. अप्पड़ अउ निरक्षर होय के पाछू घलो ओला किसम किसम के जिनिस बनाय बर आथे. जब ले लोहाजुग के शुरुआत होइस हे तब ले मनखे के जिनगी मा नवा रद्दा बनिस हे. विकास अउ नवा संस्कृति सभ्यता के जनम होइस हे. लोहार बढ़ई मन इही रद्दा मा चलइया मनखे होइन. एमन मनखे के रहे बसे, सूते बइठे के, खेतीखार मा बउरे के जिनिस ला लोहा अउ लकड़ी मा संघेर जिनिस के सहयोग से बनाथे. एला बनाय बर किसम किसम के औजार ला बउरथे.

अपन घर के बूता, परोसी घर बनिहारी करेबर  जाथे तब ए जिनिस मन हर किसान के घर मा मिल जाथे जौन ला धरके अपन खेती-खार, बखरी-बारी, घर कुरिया मा जिनगी जीए बर अन उपजाय बर बउरथे. एमा रापा, कुदारी, गैंती, टंगिया, साबर सबरी, हँसिया, पइसुल, घन, गुट्ठा, छिनी,हथोड़ी, बसूला, बिंधना, आरा आरी, रेंदा, पटासी, चिमटा, गिरमिट, भँवारी, अइसने कतको किसम के जिनिस हमर तीर तखार घर कुरिया मा देखेबर मिलथे.

1. रापा- एहा आधा हाथ के लोहा के चौरस चाकर प्लेट होथे.जेखर एक कति गोल मुड़ी बनाय जाथे एमा दू हाथ के लकड़ी के बेंठ लगाय जाथे. एमा बन छोले, माटी जोरे अउ खने के बुता करे जाथे.

2. कुदारी- एहा लोहा के बने एक बीता ले आधा हाथ लक लम्बा थोरिक मोठ होथे. एक छोर मा लकड़ी के बेंठ लगाय बर गोल मुड़ी होथे.दूसर छोर हा सुचकी होथे. एमा भुँइया ला खने कोड़े के बूता करें जाथे.एमा दू हाथ ले थोकिन खंगा के लकड़ी के बेंठ धराय जाथे.

3. टंगिया- टंगिया हा कुदारी अतका बड़ लोहा के जिनिस आय. एमा घलो कुदारी बरोबर बेंड बर मुड़ी रहिथे.कुदारी अउ टँगिया मा एक फरक ए रहिथे कि कुदारी हा मोठ अउ एक छोर हा सुचकी रहिथे फेर टँगिया हा मुड़ी कर ले चार आंगूर चेपटा होते अउ छोर हा धरहा होथे. एमा पेड़ अउ सुक्खा लकड़ी ला काँटे जाथे.

4. गैंती- एहा कुदारी अउ टंगिया के मिंझरा रुप होथे. एखर दू भाग होथे बीच मा बेंठ बर मुड़ी अउ एक कति कुदारी असन दूसर कति टँगिया असन रहिथे. टँगिया कति हा जादा धरहा नइ रहय. एमा भुँइया ला कोड़े के बूता करे जाथे.

5. साबर सबरी- एहि लोहा के तीन हाथ ले आगर डंडा सन रहिथे. एक कति ला कुदारी असन सुचकी बनाय जाथे.एहा भुँइया ला गड्ढा खने कोड़े बर बउरे जाथे. सबरी हा थोकिन छोटे होथे. एखर रुप हा वइसनेच होथे.

6. घन- एहा लोहा के 3-4 किलो के आधा हाथ मोट्ठा गोला होथे.बीच मा बेंठ लगाय बर गोल भुलका के मुड़ी होथे. एखर दूनों कती चार अंगूर के चाकर माथा होथे जौन छे कोर वाले होथे. एहू मा दू हाथ के बेंठ लगाय जाथे. एला दूनों हाथ मा धरके मुड़ी उपर ले उठा के गुट्ठा मा पटके जाथे.

7. गुट्ठा- एहा साबर के नान्हे रुप होथे मोटई जादा होथे मुड़ी ला घन परे बर चाकर राखे जाथे. बड़े बड़े लकड़ी के गोला ला फँकियाय बर एला लकड़ी मा खिला ठेसे बरोबर मारे जाथे अउ एहा लकड़ी मा निंगत जाथे अउ दू फाँकी कर देथे

8. आरा आरी-  आरा हा लोहा के बने आधा हाथ चाकर अउ चार हाथ लम्बा प्लेट होथे. जेखर दूनो छोर मा लकड़ी के मूठ लगे रथे. जेला दू झन मनखे दूनो हाथ मा आगू पीछू तीरथे. एखर एक तीर मा तीरे तीर दाँता होथे. एला पेड़ काटे अउ चीरे बर बउरे जाथे. आरी हा एकर नान्हे रुप होथे.यहू मा एक तीर मा दाँता होते. एमा एक छोर मा लकड़ी के मुठिया होथे.एला एक झन मनखे हा लम्बा लकड़ी, बाँस ला नापा के मुताबिक चुनें बर एला बउरे जाथे

9. बसूला- बसूला हा टंगिया के रुप मा होथे फेर एहा मुड़ी ले छोर तक मोठ रथे.अउ छोर हा टँगिया असन धरहा रथे. एखर बेंठ हा एक हाथ ले थोकिन आगर रथे.

10. रेंदा- एहा लकड़ी ला चिक्कन करे के ,लोहा के चाकर पट्टी ला लकड़ी संग मिंझार के आगू पीछे घुमा के जिनिस आय.एमा लकड़ी के जिनिस ला चिक्कन करे जाथे.

अइसने किसम के कोनो जगा छेदा बेधा करेबर होथे ता बिंधना, भँवारी, गिरमिट ला बउरे जाथे. लकड़ी ला नापा जोखा मा बइठारे बर पटासी ला घलो बउरे जाथे. गिरमिट, भँवारी हा लम्बा अउ सुचकी रथे.बिंधना पटासी हा चेपटा अउ टंगिया बरोबर होथे. एमा बेंठ नइ रहय मुठ रहिथे. जेमा हथोड़ी नइते  बसूला के मुड़ी डहर ले मारे जाथे.एहा कपाट, कुरसी, टेबुल बनाय बेरा छोले बर बउरे जाथे. इही किसम के दू जगा बूता मा बउरे वाला जिनिस हँसिया, चिमटा घलो आय. जौन ला मनखे अपन घर परिवार अउ खेती किसानी मा बउरे बर राखे जाथे.




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