धमतरी के दुगली गांव की लड़कियों ने स्वरोजगार का मॉडल खड़ा किया.
दुगली गांव में 10 लड़कियों के समूह ने खड़ा किया रोजगार का रूरल-मॉडल. यहां का बना तिखूर हो या बैचांदी, आंवला कैंडी या दोना-पत्तल जैसे दर्जन भर प्रोडक्ट न सिर्फ धमतरी, बल्कि प्रदेश के कई जिलों में सप्लाई किए जाते हैं.
सालाना 4 लाख तक की कमाई
आज लड़कियों का ये समूह हर साल 4 लाख तक मुनाफा कमा रहा है. यहां का बना तिखूर हो या बैचांदी, आंवला कैंडी या दोना-पत्तल जैसे दर्जन भर प्रोडक्ट न सिर्फ धमतरी, बल्कि प्रदेश के कई जिलों में सप्लाई किए जाते हैं. प्रोडक्ट की गुणवत्ता इस तरह से मेंटेन की गई है कि लोग दुगली आकर भी सामान खरीदते हैं. जागृति समूह की चंद्रवती और ज्योति ने बताया कि अपने गांव के आसपास जंगल में मिलने वाले वनोपज को बाजार में लाने के लिए इन लोगों लोन लेकर काम शुरू किया था. अब काफी कमाई हो जाती है. उन्होंने बताया कि अब न सिर्फ वह अपने घर में आर्थिक मदद कर पाती हैं, बल्कि सुनहरे भविष्य का सपना भी देखती हैं.
वन विभाग भी करता है मददस्वयं सहायता समूह की लड़कियों की मेहनत को देख वन विभाग भी इनकी मदद करता है. चाहे लोन दिलवाने की बात हो या कच्चा माल खरीदना या उन्हें प्रशिक्षण दिलवाना हो, विभाग हर तरह से इनकी मदद को हाजिर होता है. धमतरी वनमंडल के डीएफओ अमिताभ वाजपेयी ने बताया कि लड़कियों की मेहनत को विभागीय मदद मिलने से कामयाबी पक्की हो जाती है. वन विभाग जल्द शहद उत्पादन के लिए फूड लाइसेंस लेने जा रहा है, जिसमें भी इस समूह की भागीदारी रहेगी. उन्होंने बताया कि जागृति समूह ने पूरे दुगली इलाके में रोजगार का एक चैनल खड़ा कर दिया है. अगर इस कॉन्सेप्ट को अपना कर प्रदेश में कई स्थानो पर ऐसा ही उद्योग खड़ा किया जा सके और वनोपज का सही दोहन किया जा सके तो प्रदेश में रोजगार की समस्या पर नियंत्रण पाया जा सकता है.

