तीरतार मा कोनो बने असन दिखतिन त संघार लेतेन chhattisgarhi tradition-belief- folk tale local stories cgpg

छत्तीसगढ़ी विशेष

छत्तीसगढ़ी विशेष

काल हा घलो काल कर डारथे तेला सबो झन जानत हांवय. सबो जगा मा एक्के बरोबर खोजबे ते पाबे कहां. तोर अपन तीरतार मा तोला बने लागथे ओइसनेहेच सबो जीव – जंतु, पेड़ – पौधा के मन मा घलो होथे तेला विज्ञानी मन बता डरे हें.

लगे मा काहीं नइ लागय फेर होना चाही, होना चाही केहे में संस्कार कोती जादा धियान जाथे. अभी घलाव कांही नइ बिगड़े हे. कहइया ला काहन देवव. एक कान ले सुनव अउ दूसर कान ले निकाल देवव काबर के पर निंदा मा बुड़इया मनखे के तें काय कर लेबे. होत बिहिनिया सबो के बिचार मानवा बात आना चाही. चारों मुड़ा के खोज खबर आज बात कहत लाग जाथे. संसारी अपन अकेल्ला रइथे तभो बना लेथे. खोज खबर के जमाना मा एक्के जगा रहिके सबो जगा मा हांवन तइसे लागथे.

हावय तेकरो खोज खबर लेवव

हमन अपने अपन मा जोड़ घटाना के विद्या मा पारंगत हावन तभो ले कइसे कउड़ी काम मा नइ आवत हे. जानबा हो जथे तहां ले पछताना पड़ जथे. एदे अतके मा का हो जाही अइसे कहइया ला कलेचुप सुन के विचारव. अतकेच के आगू पाछू पूरा संसार किंदरत हावय. तपासे असन जिनगी का काम के. बने रम्हड़िया के संसो ला टार दे तब देख तोला नवा – नवा गियान मिलत जाही. रोज हमन ला अपन चिंतन बर रम्हड़ियाएच ला परही. समय कु समय हावय तेकरो खोज खबर लेना चाही. मानवमन मा ईश्वर के जागृत अवस्था मा बिसवास जरूरी हे. चलतेच रहिबे त तोला कांही न काहीं मिल हीच.

जेला खोजत हावस तेने तिहीं हरसमेंकरा कस जाला सरी संसार ला फांद डरे फेर पार नइ पाए. उधेड़ बुन के सेती नोहे संसार. तोर जाला ला करम बनाइस तेन कोने. कोन डाहर ले बुनवइया तोर बुनाई मा संघरे हावय तेला जान. आही तेन जाही फेर का करके जाही इही सपना सबो देखत होही. सपना सपनाई घलो एक ठन बुता हरय. जीयत जागत सपना मा रंग भरे के काम मा हमर कोन मदद करत हे तेला खोज. खोज डरे हंव कहिके रद्दा ले झन भटक. भटके संसार के गति बने नइ रेहे सकय. मिहिच हरंव अइसे कहिके अपने आप मा झन राहय नइते बईद डाक्टर के काम ला कोन संजो ही.चलत ले अपन सबो चलावत आइन हे. फेर चलइया कोन हरय. चलइया तो तिही हरस. तोर पाछू मा हावय तेन अपन आप मा नइ राहय ओला सबो डाहर ला चलाना परथे.

संघार के राखबे ते जूड़ सीत हा नइ जियानय

बुता करे मा जियानिस त ते जानले तोर मन के भटकऊल होगे हे. एक घांव भटके तहां रद्दा खोजत खोजत जुग बुड़ जाही अउ ते धंधाएच रहिबे. मिलगे त खाले नइते लांघन उपास अइसे मा कतका दिन खटाबे. चरबत्ता करईया के जिनगी ला सुख देवइया के दिन ले संघरे रिही तेला कोनो नइ जानय अउ कहिबे ते पतियाही कोन. संगे संग मा चलाव के रद्दा आजेच तोला मंजिल के रद्दा चिन्हारी करा दिही. लगन अउ मगन इही समरथ बनाही त चलव संघारे के बात करी. सकलाए मया अबड़ मयारूक होथे देखतेच मा अपन असर डारथे. बिपत परे मा इही हमर काम आथे. एक दूसर ला जानके अउ मानखे राखे राहव.

कतका दिन बुलकगे फेर अउ बांचेच हे
गनती करइया के गनती कभू नइ सिरावय काबर के गनती बनेच हे गनती करे बर. दिन हा बादर ला पोटारे रथे मन लागिस त ढिल्ला कर दिस नइ मन लागिस त का हो जाही तेला कोन बताही. काल हा घलो काल कर डारथे तेला सबो झन जानत हांवय. सबो जगा मा एक्के बरोबर खोजबे ते पाबे कहां. तोर अपन तीरतार मा तोला बने लागथे ओइसनेहेच सबो जीव – जंतु, पेड़ – पौधा के मन मा घलो होथे तेला विज्ञानी मन बता डरे हें. बने अउ गिनहा के चिन्हारी कोन करही तें खुद करबे तभे तो आगू के बात बन ही. सबो के सेती अपने अपन चिंतन ला संघार के बने सद्गति के बिचार ला आगू लाए बर परही. देखइया अउ सुनइया के संसार मा सबले सबल कोन हरय आज हमनला खोजना हे. तभे बात बनही.







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