- कमलेश भट्ट की संयुक्त अरब अमीरात में हार्ट अटैक से हो गई थी मौत
- गुरुवार रात अबू धाबी से विमान के जरिए दिल्ली एयरपोर्ट लाया गया था शव
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की राजधानी अबू धाबी से दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे कमलेश भट्ट समेत तीन भारतीयों के शव को वापस भेज दिया गया है. गुरुवार रात कमलेश भट्ट का शव एतिहाद एयरवेज के विमान से दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचा था, लेकिन मंत्रालयों के बीच तालमेल की कमी के चलते शव को शुक्रवार सुबह अबू धाबी लौटा दिया गया.
इसके चलते कमलेश भट्ट के परिवार को अब तक शव का इंतजार करना पड़ रहा है. कमलेश भट्ट संयुक्त अरब अमीरात में काम कर रहे थे. लॉकडाउन के दौरान कमलेश भट्ट की मौत हो गई थी. उनकी मौत कोरोना वायरस की वजह से नहीं, बल्कि मौत हार्ट अटैक से हुई थी. कोरोना वायरस से मौत नहीं होने के बावजूद कमलेश भट्ट के शव को दिल्ली एयरपोर्ट से अबू धाबी वापस भेजा गया.
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कमलेश भट्ट का परिवार उत्तराखंड के टिहरी का रहने वाला है. अब परिजनों ने भारत सरकार से अपील की है कि वह कमलेश भट्ट का शव वापस लाने में मदद करे. 16 अप्रैल को हार्ट अटैक के चलते उनकी मौत हो गई थी. सभी क्लीयरेंस मिलने के बाद गुरुवार को कमलेश भट्ट समेत तीन भारतीयों के शवों को लेकर एतिहाद एयरवेज का विमान दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचा था, लेकिन शुक्रवार सुबह उसी विमान से उनके शवों को फिर वापस भेज दिया गया.
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संयुक्त अरब अमीरात स्थित भारतीय दूतावास ने मृतक के परिवार के एक खत और सभी औपचारिकताओं की जांच करने के बाद एनओसी दिया था, जिसके बाद उनके शवों को दिल्ली लाया गया था. सूत्रों के मुताबिक कोरोना वायरस के अलावा अगर दूसरी वजह से किसी भारतीय की मौत होती है, तो उसके शव को अबू धाबी स्थित भारतीय दूतावास और दुबई स्थित वाणिज्य दूतावास लगातार भेजा रहा है.
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वहीं, इस मामले में अभी तक गृह मंत्रालय की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है. कोरोना के अलावा किसी अन्य कारण से विदेश में मौत होने पर भारतीयों के शवों को वापस लाने की नीति में बदलाव की जानकारी भी नहीं दी गई है. विदेश मंत्रालय ने भी इस पर कोई पाबंदी लगाने की सूचना नहीं दी है.
वहीं, कोरोना वायरस के चलते मोदी सरकार ने देशव्यापी लॉकडाउन कर रखा है और अगले आदेश तक बाहर से किसी के भी आने पर रोक लगा रखी है. विदेशों में स्थित भारतीय दूतावास भी उन लोगों के शवों को नहीं भेज रहे हैं, जिनकी मौत कोरोना से हो रही है. हालांकि दूसरे किसी कारण से मौत होने पर शवों को भेजा जा रहा है, लेकिन लॉकडाउन के दौरान शवों को वापस लौटाने का यह पहला मामला है.


