दिल्ली हिंसा का दंशः डरे-सहमे बच्चों ने सोशल मीडिया और टीवी से बनाई दूरी – Delhi violence students distance social media television examination psychologist advice

  • हिंसा की खबर से बच्चों का पढ़ाई से हट जाता है ध्यान
  • बच्चों को हिंसा की खबर से दूर रखने की दी जा रही सलाह

दिल्ली हिंसा के खौफनाक मंजर का बच्चों के दिलोदिमाग पर गहरा असर डाला है. इस हिंसा से डरे और सहमे बच्चों ने सोशल मीडिया और टीवी से दूरी बना ली है. एग्जाम दे रहे छात्रों के इंटरव्यू से खुलासा हुआ कि दिल्ली हिंसा को लेकर उनके मन में डर बैठ गया है. वहीं, दिल्ली हिंसा के बाद अब प्रशासन आम लोगों में विश्वास बहाली का प्रयास कर रहा है.

दिल्ली सरकार ने विश्वास बहाली के लिए पीटीएम का सहारा लिया है, तो छात्रो ने ग्रुप डिस्कशन का रास्ता अपनाया है और टीवी व सोशल मीडिया से दूरी बना ली है. जिंदल पब्लिक स्कूल में पढ़ने वाले 10वीं के छात्र अनंत गर्ग का कहना है कि दिल्ली हिंसा के कारण उनकी पढ़ाई बिल्कुल नहीं हो पा रही थी और वो इस चिंता में थे कि वो एग्जाम कैसे देंगे? हालांकि स्कूल प्रशासन की तरफ से इस डर और सदमे को कम करने में मदद की जा रही है.

छात्र विजय के मुताबिक हम सोशल मीडिया से भी दूर रह रहे है. दिल्ली हिंसा की खबर से परीक्षा में दिक्कत हो रही है, लेकिन हिंसा से ध्यान हटाने के लिए दोस्तों के साथ ग्रुप डिस्कशन कर रहा हूं. 10 कक्षा की छात्रा कनक का कहना है कि सोशल मीडिया और टीवी से लगातार दिल्ली हिंसा की खबरें मिल रही हैं. इससे सभी छात्रों में डर भर गया है. इस भयावह और डरावने माहौल से बाहर निकलने में शिक्षक और माता-पिता भरपूर सहयोग कर रहे हैं.

हिंसा की खबर सुनकर विचलित हो जाते हैं विद्यार्थी

विद्यार्थियों और उनके अभिवावकों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि कहीं बोर्ड परीक्षा परिणामों पर दंगे का असर न पड़ जाए. सीनियर साइकोलॉजिस्ट आभा सिंह के मुताबिक छात्र-छात्राओं के सिर पर पहले से ही परीक्षाओं में अच्छा प्रदर्शन करने का बोझ होता है. और ऐसे में हिंसा उनके मन में डर व तनाव को बढ़ाती है. परीक्षा के दौरान विद्यार्थी हिंसा की खबर सुनकर विचलित हो जाते हैं और ध्यान को पूरी तरह से केंद्रित नहीं कर पाते हैं. इसके साथ ही विद्यार्थी निराशा के भी शिकार हो जाते हैं. लिहाजा इन सबसे बचाने के लिए बच्चों को मोबाइल और सोशल मीडिया से दूर रखना चाहिए.

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जिंदल पब्लिक स्कूल के प्रधानाचार्य उत्तम सिंह बताते हैं कि परीक्षा के दौरान बच्चों की मानसिक स्थिरता को बढ़ाने और शैक्षणिक संसाधनों का उपयोग करने के लिए अभिवावकों व स्कूल प्रशासन के बीच सहयोग की आवश्यकता है. माता-पिता को हिंसा के दुष्प्रभाव से बच्चों को बचाने के लिए घर पर एक सकारात्मक वातावरण विकसित करने की कोशिश करनी चाहिए. हिंसा का सबसे जयादा प्रभाव बच्चों पर पड़ता है. जहां नॉर्थ ईस्ट दिल्ली में स्कूल 7 मार्च तक बंद हैं, तो वही दिल्ली सरकार बुधवार से कॉन्फिडेंस बिल्डिंग प्रोग्राम चलाने का फैसला लिया है.

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