- सफुरा जर्गर पर यूएपीए के तहत कार्रवाई
- दिल्ली पुलिस ने किया था सफुरा को गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस ने जामिया कोऑर्डिनेशन कमेटी की मीडिया प्रभारी सफुरा जर्गर पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए के तहत कार्रवाई की है. सफुरा जर्गर को हाल ही में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने गिरफ्तार किया था.
दरअसल, सफुरा ने कोर्ट में जमानत के लिए अर्जी लगाई थी. तब अदालत में दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने बताया कि हमने आरोपी के खिलाफ यूएपीए के तहत कार्रवाई की है. वहीं सफुरा की जमानत अर्जी खारिज हो गई है. स्पेशल सेल अभी मामले में जांच कर रही है.
क्या है मामला?
दरअसल, सफुरा जर्गर पर नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के खिलाफ भीड़ को जुटाने और हिंसा कराने का आरोप है. सफुरा जर्गर पर आरोप है कि उसने सीएए के खिलाफ प्रदर्शन के लिए जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के नीचे महिलाओं को जुटाया था.
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सूत्रों के मुताबिक सफुरा जर्गर को जाफराबाद मेट्रो स्टेशन पर विरोध प्रदर्शन में शामिल रहते भी देखा गया था. सफुरा जर्गर की गिरफ्तारी उस समय सामने आई है, जब कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए मोदी सरकार ने देशव्यापी लॉकडाउन कर रखा है.
क्या है सीएए?
बता दें कि मोदी सरकार ने पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में उत्पीड़न के शिकार अल्पसंख्यकों यानी हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को नागरिकता देने के लिए नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) बनाया है. इसका कांग्रेस पार्टी समेत अन्य विपक्षी दल और मुस्लिम समुदाय के लोग विरोध कर रहे हैं.
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मुस्लिम समुदाय के लोग नागिरकता संशोधन कानून को अपने खिलाफ बता रहे हैं. साथ ही इस कानून को धर्म के आधार पर भेदभाव वाला बता रहे हैं. कुछ लोगों का यह भी दावा है कि सीएए से मुस्लिम समुदाय के लोगों की नागरिकता चली जाएगी. हालांकि मोदी सरकार साफ-साफ कह चुकी है कि नागरिकता संशोधन कानून का हिंदुस्तान के मुसलमानों का कोई लेना देना नहीं हैं.
सीएए के विरोध में हिंसा
सरकार का कहना है कि यह पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने वाला कानून है. इसमें किसी की नागरिकता छीनने का कोई प्रावधान नहीं हैं. नागरिकता संशोधन अधिनियम को सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी गई है. नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ शाहीन बाग और जाफराबाद में हुए विरोध प्रदर्शन के खिलाफ भी लोग सड़कों पर उतरे थे. इसके बाद दिल्ली में हिंसा भी हुई थे, जिसमें 50 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी.