धरती के कोख ला सिरजइया तोर कोन मेरन हे बासा

छत्तीसगढ़ी विशेष

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अइसन सुघ्घर हमर संसार के रचना करईया तोर आगू मा सबो माथ नवावत आवत जावत हावंय. आज ला जीए बर तोरे आसिरवाद हा फलित होवत जावय एही हरय आनी बानी के संसार ला भोगत जागत राहय.

खोजत – खोजत जिंदगी पहा जाथे तभे सत के पथ मा रेंगइया ला आभास हो जथे एही मेरन तीर तार मा कोनो मेरन ईश्वर होही. मन मा बिचार आथे अउ निराकार के कल्पना मा सुध बुध भुला जाने वाला जीव तोर अमरत्व बर तोला सतकर्म करना परही. जाये के बेरा जतन करइया तोर दरसन बर तरसत रइही. इही जीवन के सार हरय.

कभू नइ जान पाएन तेन काए

चीन्हे पहिचाने सबो झन के पांव पयलगी करत हमन देखे हवन. इहां रहिके अनचिन्हारी घलो मान पाथे. चारेच दिन मा का हो जथे के चिन्हा चिन्हारी सदा दिन बर अन्तस मा समा जाथे. आज के जुग मा देखबे ते हमर सियान आजो धीर धरे के शिक्षा देवत रहिथे. उम्मर के सेती कतको झन अपने अपन मा रइथें. काबर ताबर के सेती मेती नइ परही तेने ए भव सागर ला पार करही. ए धरती मा जनम धरइया सबो जीव अपनेच अपन मा नइ रेहे सकंय. एक दूसर के आसरा सबो ला रइथे. जानथे तेने मानथे इही हमर संसार ए.

मानगऊन करइया तोर जय होवयकहिथे नहीं के का होगे हमन ला. हमन काकर संतान हरन. हमर जिनगी के का महत्तम हे. बस अतकेच मा चेतलगहा मनखे अपन समाज मा रहिके अपन पहिचान बना डारथे. संसो नइये तभो ले भीतरे भीतर चुरईया आज तोरेच काम के गुन गावत जावत हे संसार. मन सबो समय मा एके किसम के नइ राहय. मन ला टमरइया अभी घलो मनघुटहा असन लागत हावे. जगा देखके गोठियाना घलो एक ठन सुन्दर संदेस देवत जाथे. संदेसा पाके आमा असन होथे जेखर अमरित असन सुवाद ला सबो जानत हें. अमरित बानी मा रसलगहा मान गऊन घलो अपन छाप छोड़थे अउ तभे चला चली के बेरा मा आत्मा ला सांती मिलथे.

आजे केहे रेहेंव तेन काए

अइसन सुघ्घर हमर संसार के रचना करईया तोर आगू मा सबो माथ नवावत आवत जावत हावंय. आज ला जीए बर तोरे आसिरवाद हा फलित होवत जावय एही हरय आनी बानी के संसार ला भोगत जागत राहय. नइ राहय कोनो दिन के अगोरा आजेच ला जेन जान डारिस तेन सुख के छइंहा के रखवार होही. अभी कहिदेते अइसनहे होना चाही. मने मन मा गुनइया सतगति ला जानय नइते पाछू पंदोली देवइया के सुरता ला राखही. अंधियारी अंजोरी हा घलो अपने कलेचुप बैरागी काया ला सकेले राहय इही हरय आज के समिलहा जिम्मेदारी.

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चल रे मन तें कतका भागबे

पल्ला भागे के बेरा गिरे अपटे के डर मनमा रइथे. मन हा तोर ले आगू भागत हावय ओला थामही कोन. कोने जेन हा मनला अतका अगुवाई करे के जिम्मेदारी देहे हावय. वोही हरय निराकार जेन घेरी बेरी परछो लेवत रहिथे. सबो जगा हावय फेर कोनो जगा नइये अइसे काबर सोचिन सोचइया इही हरय मायाजाल. माया के सेती फसकरियाए कहूं बइठे हावय अउ कहूं भागादउड़ी मा सिराए असन जागत हावंय. सिराजाही सबो सिराजाही एला ते छोंड़ देबे तभे संसारी होए के मौका पाबे नइते सोंचत रहिबे धरती के कोंख ला सिरजइया तोर कोन मेरन हे बासा.







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