नई दिल्ली: एक तरफ जब लॉकडाउन (Lockdown) की वजह से प्रकृति में सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहे हों, वहीं एक नदी में टनों मछलियों का मर जाना हैरान करता है. इतनी बड़ी तादात में मरी हई मछलियों पर फिलहाल फ्रांस और बेल्जियम आमने सामने आ गए हैं.
बेल्जियम की स्थानीय सरकारों ने फ्रांस पर आरोप लगाया है कि चुकंदर की एक रिफाइनरी में हुए रिसाव की चेतावनी फ्रांस ने ठीक तरह से नहीं दी और इसी वजह से शेल्ट नदी में मछलियां मर गईं.
ये भी पढ़ें: ये कोई आम पत्थर नहीं बल्कि चांद का टुकड़ा है, किया जा रहा नीलाम; कीमत आप सोच भी नहीं सकते
बेल्जियम के वलोनिया प्रांत का कहना है कि फ्रांस से बहने वाले प्रदूषित पानी की वजह से टनों मछलियां मारी गई हैं. वलोनिया का दावा है कि उस इलाक़े में 50-70 टन मछलियां मरी हुई पाई गईं. वलोनिया में 36 किलोमीटर में फैली शेल्ट नदी में जगह-जगह मरी हुई मछलियां बरामद हुईं.
दक्षिणी बेल्जियम का फ्रांसीसी भाषी क्षेत्र वलोनिया, फ्रांस की सीमा से सटा हुआ है. उन्होंने फ्रांसीसी अधिकारियों पर इस बाबत चेतावनी जारी करने में सुस्ती दिखाने का भी आरोप लगाया है.
हालांकि, फ्रांसीसी कंपनी ने कहा है कि बेल्जियम में मृत पाई मछलियों का उनकी रिफाइनरी में रिसाव से कोई संबंध नहीं है. फ्रांसीसी चीनी निर्माता टेरोस का कहना है कि 9 अप्रैल को एक रिसाव पाया गया था, जिसे 10 अप्रैल को ठीक कर लिया गया था और उसके बाद 13 अप्रैल स्थितियां सामान्य भी हो गई थीं. लेकिन बेल्जियम का कहना है कि फ्रांस के सुस्त रवैये से समस्या और बढ़ गई.
ये भी देखें-
वलोनिया के पर्यावरण मंत्री सेलीन टेलर ने तो यहां तक कहा कि वलोनिया में प्रदूषण फैलाने वाले पर 1 मिलियन यूरो तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. फ्रांसीसी पर्यावरण मंत्रालय का अभी तक इस संकट पर कोई जवाब नहीं आया है.

