पंद्रह दिन में दोगुनी हुईं कोरोना से होने वाली मौतें, दुनिया में 8वें नंबर पर पहुंचा भारत – Coronavirus india death toll doubling maharashtra delhi diu

  • दिल्ली, महाराष्ट्र के बैकलॉग से बढ़ी तादाद
  • तमिलनाडु में आंकड़ों पर उठ रहे सवाल

भारत में कोरोना वायरस से होने वाली मौतों का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है. 3 जून तक 5,815 मौतें हुई थीं. मात्र 15 दिन में यह संख्या दोगुने से भी ज्यादा हो गई और 17 जून को यह आंकड़ा 11,903 पहुंच गया. इस उछाल का करीब 20 फीसदी तो बुधवार को दर्ज हुआ, क्योंकि ​महाराष्ट्र और दिल्ली ने उन मामलों को भी जोड़ दिया जो अब तक दर्ज नहीं किए गए थे.

इस उछाल के चलते भारत 8वां ऐसा देश बन गया है, जहां कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा मौतें हो चुकी हैं. इसके अलावा, भारत में Covid-19 की केस फैटिलिटी रेट यानी मृत्यु दर 2.9 फीसदी से 3.4 फीसदी पर पहुंच गई है. भारत में आधिकारिक तौर पर मरने वालों की संख्या शुरुआत में कम रही है.

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रोजाना होने वाली मौतों के सात दिनों के रोलिंग एवरेज से पता चलता है कि भारत में अप्रैल के पहले सप्ताह में सात मौतें दर्ज हुईं, जो कि 17 जून तक बढ़कर 359 हो गईं. 11-17 जून से रोजाना औसत मौतों की अधिकतम संख्या महाराष्ट्र (154), दिल्ली (78), गुजरात (32) और तमिलनाडु (23) से दर्ज की गई. ये भारत के वे राज्य हैं जहां पर सबसे ज्यादा केस हैं.

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बुधवार को भारत में एक दिन में होने वाली मौतों की संख्या 2,003 रही, जिनमें से दो तिहाई मौतें अकेले महाराष्ट्र में हुईं. पिछले दिन के मुकाबले मौतों में रोजाना बढ़ोतरी आठ गुना रही. राज्य में 17 जून को 1,409 मौतें दर्ज हुईं, जिनमें करीब 95 फीसदी बैकलॉग से थी. सबसे अधिक अनरिपोर्टेड मौतें मुंबई से दर्ज हुईं, जहां लगभग 1,000 मौतों को समायोजित किया गया.

दिल्ली ने भी मौतों के अपने आंकड़े में बैकलॉग को समायोजित किया है. बुधवार को दिल्ली में दैनिक मौतों की संख्या पिछले दिन की संख्या से छह गुना थी. 17 जून को राजधानी में 437 मौतें दर्ज की गईं. यह संख्या 17 जून को भारत में हुई कुल मौतों का करीब 22 फीसदी है.

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महाराष्ट्र और दिल्ली में मौतों की संख्या को लेकर दर्ज यह असफलता बताती है कि कोरोना के कारण जितनी मौतें दर्ज हुई हैं, वास्तविक संख्या उससे कहीं अधिक है. वेल्लूर के क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज के प्रसिद्ध विषाणु-विज्ञानी (वायरोलॉजिस्ट) और पूर्व वायरोलॉजी के प्रोफेसर डॉ टी जैकब जॉन को भी इसी तरह का संदेह है.

डॉ जॉन ने इंडिया टुडे से कहा, “केंद्र और राज्य नकार की मन:स्थिति में हैं. उनका कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है. संख्या बढ़ रही है और ऐसा हो सकता है कि वास्तविक परिदृश्य को छिपाने के लिए उन्हें दर्ज नहीं किया जा रहा हो.”

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तमिलनाडु में भी कोरोना से होने वाली मौतों के आंकड़े की सटीकता पर सवाल उठाए गए हैं. इस राज्य में बुधवार को हुई 49 मौतों सहित कुल 528 मौतें दर्ज हुई हैं. दो अन्य सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य हैं गुजरात और हरियाणा, जहां मौतों की संख्या में मामूली वृद्धि दिखाई जा रही है.

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लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन के मैथमैटिकल एपिडेमोलॉजिस्ट टिमोथी रसेल ने “नेचर ” मैगजीन को बताया कि महामारी के प्रकोप के बीच संक्रमण की सटीक मृत्यु दर की गणना चुनौतीपूर्ण है क्योंकि यह इस पर निर्भर करता है कि संक्रमित लोगों की कुल संख्या की जानकारी हो, जिसकी पुष्टि टेस्टिंग के माध्यम से की जाती है.

महामारी की हालत में मौतें यह जानने का एक पैमाना हैं कि जनता को जो स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हैं, उनकी क्षमता कैसी है. भारत में जितनी मौतें हुई हैं, उनमें से 66 फीसदी मौतें सिर्फ महाराष्ट्र, दिल्ली और तमिलनाडु में दर्ज हुईं हैं. ये अच्छी स्वास्थ्य सुविधाओं वाले राज्य हैं. अब मुख्य सवाल यह है कि जब इन राज्यों में यह हाल है तो उन राज्यों में क्या हाल होगा, जहां पर स्वास्थ्य सुविधाएं कमजोर हैं?

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