मध्य प्रदेश में शराब की नई दुकानें खोलने को लेकर सियायत गरमाई है। इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने एक कदम आगे बढ़कर शराबबंदी करने की पैरवी कर दी है। उन्होंने शुक्रवार को कहा कि नशा करने के बाद ही रेप की घटनाएं बढ़ रही हैं, इसलिए नशा और शराबबंदी होनी चाहिए।
ऐसा निर्णय लेने के लिए राजनैतिक साहस की जरूरत होती है। मध्य प्रदेश में शराबबंदी को लेकर अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसे लेकर वह आज कल में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात भी करेंगी।
उमा भारती ने कहा कि शराब माफिया राजनेता और ब्यूरोक्रेसी को अपनी जकड़न में ले लेता है। राजस्व आमदनी के दूसरे उपाय भी हैं। यहां श्वेत क्रांति हो सकती है। लोगों की जान की कीमत पर धन की उगाही ठीक नहीं है। उन्होंने फिर दोहराया कि लॉकडाउन में शराब की दुकानें बंद रहीं। शराब नहीं पीने से किसी की मौत नहीं हुई। इसके बाद मैंने भाजपा के दो मुख्यमंत्रियों को शराबबंदी का प्रस्ताव दिया था। शिवराज से भी बात की थी, क्योंकि स्वस्थ समाज का निर्माण सरकार की जिम्मेदारी है।
उमा भारती ने गुरुवार को भी सोशल मीडिया के जरिए शराबबंदी को लेकर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से अपील की थी। उन्होंने लिखा था- ‘मैं सार्वजनिक अपील करती हूं कि बीजेपी शासित राज्यों में शराबबंदी की तैयारी करिए।’ उन्होंने बिहार में शराबबंदी को लेकर कहा कि राजनीतिक दलों को चुनाव जीतने का दबाव रहता है। बिहार की बीजेपी की जीत यह साबित करती है कि शराबबंदी के कारण ही महिलाओं ने एकतरफा वोट नीतीश कुमार को दिया।
सरकार को सलाह – राजस्व क्षतिपूर्ति के लिए बनाएं मंत्रियों की कमेटी
उमा भारती ने सरकार को सलाह दी है कि राजस्व की क्षतिपूर्ति के लिए मंत्रियों की समिति बनाई जा सकती है। दबाव या भयभीत करके शराब बंदी नहीं हो सकती, सहमति बनाकर होगी। शराबबंदी की प्रक्रिया कई फेज में शुरू करनी होगी। उन्होंने कहा कि इस बारे में शिवराज से बात करूंगी। मुझे नहीं लगता कि प्रदेश में शराबबंदी नहीं हो सकती है।
सिंधिया के लिए ढाल बनकर खड़ी रहूंगी
ज्योतिरादित्य सिंधिया के पड़ोसी बनने पर उमा भारती ने कहा- मुझे बहुत खुशी हो रही है कि मेरा भतीजा मेरे पास आ गया है। पड़ोसी बन गया है। वह बहुत सभ्य व्यक्ति हैं। बचपन से मेरा स्नेह उन पर है। उनमें कोई महाराजा वाले नखरे नहीं हैं। उनके ऊपर कोई संकट आएगा तो मैं ढाल बन कर खड़ी रहूंगी।
यह राज भी खोला
उमा भारती ने कहा कि वह सिंधिया के खिलाफ चुनाव प्रचार के लिए नहीं जाती थीं। पार्टी को मना कर देती थीं। उन्होंने कहा -मैं पार्टी से कहती थी कि वसुंधरा को लाओ तो मैं भी जाऊंगी। ना वसुंधरा, ज्योतिरादित्य के खिलाफ में प्रचार करती थीं ना मैं। हमारी जोड़ी तब से है, जब से वे कांग्रेस में थे।
दिग्विजय सिंह का मुंह ही उनका सबसे बड़ा शत्रु
उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर के लिए पूरी आस्था से दान दिया होगा, लेकिन साथ ही साथ पिछले चंदे का हिसाब भी मांग लिया. यहीं उनसे गलती हुई। क्योंकि दिग्विजय का सबसे बड़ा शत्रु उनका मुंह है। मुंह पर उनका कंट्रोल नहीं है।