पूर्व PAK पेसर ने माना- जिसे डेब्यू में जल्दी निपटाया, वह बना महान बल्लेबाज – i got him early waqar younis recalls how he got sachin tendulkar out in their debut test in karachi tspo

  • वकार और सचिन दोनों ने एक साथ टेस्ट पदार्पण किया था
  • … डेब्यू टेस्ट में सचिन को वकार ने अपना शिकार बनाया

पाकिस्तान के पूर्व कप्तान और तेज गेंदबाज वकार यूनुस ने सचिन तेंदुलकर के डेब्यू को याद किया है. मजे की बात है कि वकार और सचिन दोनों ने 1989 में भारत और पाकिस्तान के बीच खेली गई सीरीज के पहले टेस्ट में पदार्पण किया था. कराची में हुए उस डेब्यू में वकार ने तत्कालीन भारतीय किशोर का विकेट हासिल किया था और वह सचिन का विकेट हासिल करने वाले पहले गेंदबाज बने थे.

सचिन तेंदुलकर ने अपने डेब्यू टेस्ट के दौरान भारत की पहली पारी में 24 गेंदों का सामना किया और 15 रन बनाए. वकार ने सचिन को अपने शानदार इनस्विंगर से क्लीन बोल्ड किया था. लेकिन 16 साल 205 दिन की उम्र वाले इस किशोर ने तभी अपनी प्रतिभा की झलक दिखला दी थी. यह पदार्पण आने वाले दिनों के लिए कई संकेत लेकर आया था. गौरतलब है कि वकार अपने टेस्ट डेब्यू वाले दिन 18 साल (17 साल 364 दिन) के थे .

इसके बाद फैसलाबाद में खेले गए दूसरे टेस्ट की पहली पारी में सचिन ने 172 गेंदों में 59 रन बनाकर अपना पहला अर्धशतक पूरा किया. अगले मैच (लाहौर) में तेंदुलकर एक और अर्धशतक के करीब पहंचे, लेकिन 41 रन बनाकर अब्दुल कादिर की गेंद पर बोल्ड हो गए थे.

वकार ने एक पॉडकास्ट के दौरान कहा, ‘पहला टेस्ट कराची में था और मैंने उसे (सचिन) जल्दी आउट कर दिया था. मुझे लगता है कि उसने 15 रन बनाए होंगे. उसने अपनी छोटी पारी के दौरान दो अच्छे ऑन और स्ट्रेट ड्राइव खेले. … उस सीरीज में सियालकोट के ग्रीन टॉप विकेट पर वह अर्धशतक (57) जड़ने में कामयाब रहा.’

waqar_070420020043.jpgवकार यूनिस (Getty)

उन्होंने कहा, ‘हम रिजल्ट चाहते थे. हम चाहते थे कि सीरीज का परिणाम निकले (सियालकोट में चार टेस्ट मैचों की सीरीज का आखिरी टेस्ट था). हमने ग्रीन टॉप विकेट बनाया था. वह (सचिन) खेलने उतारा. शुरू में ही उसे नाक पर गेंद लगी. 16 साल का बच्चा… चोट के बाद बिल्कुल पीला-सा पड़ गया था, लेकिन बहुत दृढ़ था.’ वकार ने कहा, ‘मुझे याद है कि सिद्धू (नवजोत सिंह सिद्धू) उनके साथ बल्लेबाजी कर रहे थे. दोनों ने दोबारा तैयार होने में पांच-सात मिनट लिये और फिर से तैयार हो गए. सचिन ने फिफ्टी पूरी की.’

आखिरकार वह टेस्ट सीरीज ड्रॉ रही. वकार ने कहा, ‘पहली नजर में उसने मुझे ऐसा नहीं लगने दिया कि वह महान सचिन तेंदुलकर बनने जा रहा है. उसके बाद के वर्षों में उसने जो किया वह अद्भुत है… मैदान पर मैदान से बाहर भी. उस समय मुझे नहीं पता था कि वह क्रिकेट में इतना बड़ा नाम होगा. लेकिन उसे उसकी मेहनत की कीमत मिल गई.

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