प्रकाश और कौवों की दोस्ती देख.. भूल जाएंगे आरिफ-सारस की जोड़ी, रोजाना मिलने आते हैं कौवें, खाकर हो जाते हैं फुर

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धमतरी के पहने वाले प्रकाश आडवाणी की कौवों से दोस्ती देख हर कोई हैरान रह जाता है. शहर में बढ़ते प्रदूषण के कारण कौवों का दिखना बंद हो गया है लेकिन कौवे अपने दोस्त से मिलने रोज प्रकाश आडवाणी की छत पर पहुंच जाते हैं. प्रकाश उन्हें दाना खिलाते हैं. इस दोस्ती को देखकर और भी लोग पक्षियों से प्यार करने लगे हैं.

प्रकाश और कौवों की दोस्ती के आगे.. भूल जाएंगे आरिफ-सारस की जोड़ीZoom

प्रकाश आडवाणी और कौवों की दोस्ती

धमतरी के एक शख्स प्रकाश आडवाणी की कौवों से अनोखी दोस्ती है. ये दोस्ताना 24 साल पुराना हो चुका है. प्रकाश के घर की छत पर रोजाना सैकड़ों कौवों आते हैं. उनके हाथों से दाना चुगते हैं. पितृ पक्ष में तो परदेसी काले कौवे भी हर साल आते हैं. इस गजब की दोस्ती को देख लोग हैरान हो जाते हैं. अक्सर इंसानों के साथ घोड़ों, कुत्तों और हाथी की दोस्ती के किस्से आपने हजारों दफा देखें और सुने होंगे. आज हम आपको इंसान के साथ कौवों की दोस्ती के बारे में बताने जा रहे हैं.

धमतरी शहर के गणेश चौक में रहने वाले प्रकाश आडवाणी गोल बाजार में छोटी सी कपड़े की दुकान चलाते हैं. इसी दुकान से होने वाली कमाई से वो अपने परिवार का पालन पोषण भी करते है और इसी कमाई का एक हिस्सा वो अपने खास दोस्तों पर भी खर्च करते है. जी हां उन कौवों के लिए जो रोज सुबह छत पर प्रकाश में मिलने पहुंच जाते है. प्रकाश इसके लिए पहले से ही तैयार रहते हैं और अपने हाथों से कौवों को उनकी पसंदीदा चीजें खिलाते हैं. ये सिलसिला बीते 24 साल से चल रहा है और खास बात ये है कि हर साल पितृपक्ष में परदेसी काले कौवों आते हैं. जो दो तीन महीने रहते हैं फिर न जाने कहा चले जाते हैं.

हैरान करने वाला नजारा
प्रकाश की कमाई का एक हिस्सा इसमें खर्च होता है. इस बात से पहले परिवार वाले नाराज हुए लेकिन. बाद में वो भी प्रकाश की भावनाओं का सम्मान करने लगे, क्योंकि उन्हें देखकर और भी लोग पक्षियों और पर्यावरण के प्रति जागरूक हो रहे हैं. इन खास दोस्तों के लिए प्रकाश बेहद चिंतित रहते हैं. खास तौर पर प्रदूषण को लेकर.

वैसे धमतरी शहर में प्रदूषण के कारण कौव्वे और कहीं दिखाई नहीं देते हैं. लेकिन प्रकाश के घर रोज सैकड़ों की संख्या में आते हैं. ये नजारा हैरान करने वाला है. धमतरी के लोग इस बात की सराहना भी करते हैं और इससे प्रेरणा भी लेते हैं.

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Mohd Majid

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