बागेश्वर धाम में गुरु पूर्णिमा महोत्सव का भव्य शुभारंभ, पहले दिन 500 श्रद्धालुओं ने ली गुरु दीक्षा

छतरपुर। विश्वभर में सनातन आस्था के प्रमुख केंद्र बागेश्वर धाम में गुरु पूर्णिमा महोत्सव का भव्य शुभारंभ हो गया है। नौ दिवसीय इस महोत्सव के दौरान देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु बागेश्वर धाम पहुंच रहे हैं। महोत्सव में पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के श्रीमुख से श्रीमद्भागवत महापुराण की कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति और आध्यात्मिक ज्ञान की गंगा में डुबकी लगा रहे हैं।

कथा के पहले दिन श्रीमद्भागवत महापुराण की महिमा का वर्णन करते हुए बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि दैहिक, दैविक और भौतिक तापों से मुक्ति का सर्वोत्तम साधन श्रीमद्भागवत महापुराण है। उन्होंने कहा कि जब जीव भगवान की शरण में चला जाता है, तब वह संसार में भटकता नहीं, बल्कि उसे जीवन का वास्तविक मार्ग प्राप्त होता है।महाराज श्री ने श्रद्धालुओं को जीवन का सार बताते हुए कहा कि मन में भरकर नहीं, मन भरकर जीना सीखो। उन्होंने प्रेम की व्याख्या करते हुए कहा कि मनुष्य का प्रेम इतना निर्मल और गहरा होना चाहिए कि उसे परमात्मा के अलावा कोई और दिखाई न दे। उन्होंने कहा कि एक बार जीव ठाकुर जी से बंध जाता है, फिर वह कभी छूटता नहीं, क्योंकि ठाकुर जी बांधना जानते हैं, छोड़ना नहीं। उनके इन प्रेरणादायी वचनों ने श्रद्धालुओं को भक्ति, प्रेम और समर्पण का संदेश दिया।

पहले दिन 500 श्रद्धालुओं ने ली गुरु दीक्षा

बागेश्वर धाम के सेवादार राजपाल सिंह ने बताया कि गुरु पूर्णिमा महोत्सव के अंतर्गत तीन दिवसीय गुरु दीक्षा कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। गुरुदेव की आज्ञा से 23, 24 और 25 जुलाई को आयोजित हो रहे इस कार्यक्रम के पहले दिन करीब 500 लोगों ने शरणागति लेकर गुरु दीक्षा ग्रहण की।उन्होंने बताया कि गुरु दीक्षा लेने वाले साधकों का विधिवत पूजन किया जाता है।

दीक्षा से पहले साधक व्रत धारण करते हैं और दीक्षा प्राप्त करने के बाद ही उन्हें भोजन प्रसाद ग्रहण करने की अनुमति होती है। पूर्व में पंजीकृत साधकों को गुरुदेव द्वारा मंत्र दीक्षा दी जा रही है। गुरु दीक्षा कार्यक्रम आगामी दो दिनों तक जारी रहेगा और जिन श्रद्धालुओं ने पूर्व में पंजीयन कराया है, उन्हें गुरुदेव भगवान से मंत्र दीक्षा प्रदान की जाएगी।

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