बताया जा रहा है कि केरल में इसका इस्तेमाल किया गया था. (Demo Pic)
बताया जा रहा इस आयुर्वेदिक काढ़े का प्रयोग भारत में पहले केरल में किया गया था जिसके बाद अब छत्तीसगढ़ के बालोद में किया जा रहा है. माना जा रहा है कि इम्यूनिटी बढ़ाने में ये काढ़ा मददगार हो सकता है.
डॉक्टरों की कही ये बात
जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. ज्योति गजभिये की मानें तो बालोद जिले के 45 आयुर्वेदिक अस्पतालों में इस कार्य का प्रयोग करवाया जा रहा है. पास के सभी क्वारंटाइन सेंटर में रह रहे प्रवासी मजदूरों को रोजाना सुबह यह काढ़ा पिलाया जाता है ताकि किसी भी प्रकार की बीमारी चाहे सर्दी, खासी, बुखार हो उसके लिए यह रोग प्रतिरोधक का कार्य करेगा. इसका प्रयोग जिला अस्पताल में कार्य कर रहे अस्पताल स्टाफ के साथ संजीवनी स्टाफ पर भी किया जा रहा है. काढ़े में मुलेठी, गिलोय, सोंठ जैसी चीजों का प्रयोग कर बनाया जा रहा है.
मामले में कमरौद गांव में पदस्थ आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. शैलेंद्र स्वर्णकार के मुताबिक काढ़ा के सेवन से इंसान के अंदर रहने वाले बैक्टेरिया खत्म करता है. इस कोरोना महामारी के वक्त यह काढ़ा काफी हद तक सार्थक साबित हो सकता है. जहां रोजाना बालोद जिले के तमाम क्वारंटाइन सेंटर के प्रवासी मजदूरों के साथ साथ सभी हॉस्पिटल स्टाफ को भी काढ़ा पिलाया जा रहा है. जिले के आयुर्वेद विभाग द्वारा किए जा रहे इस कार्य को लेकर बालोद में पदस्थ रही तत्कालीन कलेक्टर रानू साहू ने भी ट्वीट कर बताए कि केरल राज्य की तर्ज पर बालोद जिले के क्वारंटाइन सेंटरों में आयुर्वेदिक काढ़ा पिलाया जा रहा है.
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First published: May 29, 2020, 1:11 PM IST


