बैंकों के साथ आज निर्मला सीतारमण की होने वाली बैठक टली, ये है वजह – Finance minister nirmala sitharaman postpones meet with psb chiefs to monday tuta

  • बैंकों की ओर से मोहलत देने की योजना पर होने वाली थी समीक्षा
  • मिल रही जानकारी के मुताबिक जल्द होगी नई तारीख की घोषणा

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की सरकारी बैंकों के सीईओ के साथ आज होने वाली समीक्षा बैठक टाल दी गई है, फिलहाल नई तारीख की घोषणा नहीं की गई है और लेकिन उम्मीद जा रही है कि जल्द ही नई तारीख बताई जाएगी. कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये निर्मला सीतारमण भी मौजूद रहेंगी, इसी वजह से बैंकों के साथ बैठक टालनी पड़ी है.

दरअसल कोरोना संकट की वजह से प्रभावित अर्थव्यवस्था को कैसे उबारा जाए बैठक में इस पर चर्चा होने वाली थी. बैठक में कर्ज लेने वालों तक ब्याज दर में कमी का फायदा पहुंचाने और कर्ज की किस्तों के भुगतान के लिए बैंकों की ओर से मोहलत देने की योजना पर भी समीक्षा होने वाली थी. जल्दी ही बैठक होगी.

कोरोना संकट के बीच कई ऐलान

दरअसल, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 27 मार्च को अपनी नीतिगत ब्याज दर (रेपो दर) में 0.75 फीसदी की बड़ी कटौती की थी. इसके अलावा रिजर्व बैंक ने बैंकों से लॉकडाउन से प्रभावित कर्जदारों को 3 महीने तक किस्तों के भुगतान में राहत देने की भी घोषणा की थी.

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गौरतलब है कि इस महीने की शुरुआत में, आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों के प्रमुखों के साथ बैठक की थी. उन्होंने बैठक में आर्थिक स्थिति का जायजा लिया था और केंद्रीय बैंक द्वारा घोषित विभिन्न मोहलत देने जैसे सहायता के उपायों के कार्यान्वयन की समीक्षा की थी.

RBI के उठाए कदम की भी होगी समीक्षा

बैठक में रिवर्स रेपो के जरिये बैंकों के लिए अतिरिक्त पूंजी की व्यवस्था का भी मुद्दा चर्चा के लिए सामने रखा जा सकता है.इसके अलावा, गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) और छोटे वित्त संस्थानों (एमएफआई) के लिए लक्षित दीर्घकालिक रेपो परिचालन (टीएलटीआरओ) की प्रगति और कोविड-19 आपातकालीन ऋण सुविधा के तहत कर्ज के आवंटनों की भी समीक्षा की जाएगी.

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इमरजेंसी लोन सुविधा के तहत, कर्जदार मौजूदा कोष आधारित कार्यशील पूंजी के अधिकतम 10 फीसदी के बराबर कर्ज का लाभ उठा सकते हैं. इसकी अधिकतम सीमा 200 करोड़ रुपये है. सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने लॉकडाउन की शुरुआत के बाद से (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उपक्रमों) एमएसएमई क्षेत्र और अन्य कंपनियों को 42,000 करोड़ रुपये के ऋण की मंजूरी दी है.

वित्त मंत्री ने गुरुवार को बताया था कि रिजर्व बैंक द्वारा घोषित तीन महीने तक कर्ज की किस्तों के भुगतान से राहत योजना के तहत 3.2 करोड़ कर्जदारों ने लाभ उठाया है. सीतारमण ने यह भी कहा था कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने मार्च-अप्रैल के दौरान 5.66 लाख करोड़ रुपये के लोन मंजूर किए हैं. लॉकडाउन हटाये जाने के तुरंत बाद इनका वितरण शुरू हो जाएगा, जिससे आर्थिक गतिविधियां तेजी से आगे बढ़ेंगी.

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