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भारत में 3 मई के बाद ऐसे होंगे हालात, क्या मिलेगी लॉकडाउन से आजादी? – india lockdown part 3 corona covid 19 concession red zone world crime

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  • तीन मई के बाद क्या होगी भारत की तस्वीर
  • पूरे देश को है लॉकडाउन हटने का इंतजार

दो किश्तों में पिछले 40 दिनों से भारत बंद है. भारत के लोग एक तरह से घरों में कैद हैं. भारत बंद की दूसरी किश्त 3 मई को खत्म हो जाएगी. तो क्या 4 मई से भारत खुल जाएगा? क्या चार मई से इस लॉकडाउन से आज़ादी मिल जाएगी? क्या 4 मई से ज़िंदगी फिर से पटरी पर लौट आएगी? हिंदुस्तान की 130 करोड़ जनता इस वक्त बस इसी सवाल का जवाब जानना चाहती है, तो आइए आपको बताते हैं कि 3 मई के बाद क्या होने वाला है.

लॉकडाउन-1 तारीख़-24 मार्च मियाद- 21 दिन

लॉकडाउन-2 तारीख़-14 मार्च मियाद- 19 दिन

देश को कोरोना से बचाने के लिए दो किश्तों में अब तक 40 दिनों के लिए भारत बंद हो चुका है. 3 मई आने वाली है. इसके साथ ही लॉकडाउन पार्ट 2 की मियाद खत्म हो जाएगी. तो अब आगे? आगे क्या होगा? देश की 130 करोड़ जनता इस वक्त बस यही जानना चाहती है कि तीन मई के बाद भारत की तस्वीर क्या होगी? क्या तीन मई के बाद घर में रहने की क़ैद से आज़ादी मिलेगी. क्या 3 मई के बाद फिर से पहले की तरह काम-धंधे शुरू हो जाएंगे? क्या 4 मई से 40 दिन से थमा हुआ देश फिर से रफ्तार पकड़ने लगेगा? या फिर 3 मई से पहले प्रधानमंत्री देश में लॉकडाउन की मियाद को बढ़ा देंगे और फिर तीसरी बार मिलेगी लॉकडाउन खुलने की तीसरी तारीख?

इस वक़्त देश में 33 हज़ार से ज़्यादा कोरोना के मरीज़ हैं. जबकि हफ्ता भर पहले तक मरीज़ों की तादाद 20 हज़ार भी नहीं थी. यानी पिछले एक हफ्ते से कोरोना के मरीज़ों की तादाद सबसे ज़्यादा तेज़ी से बढ़ी है. लेकिन जानकारों की मानें तो ये तेज़ी भी कुछ नहीं है, क्योंकि मरीज़ों की तादाद बढ़ने की असली तेज़ी सबसे ज़्यादा अगले एक दो हफ्तों में ही देखने को मिलेगी और ये वो वक़्त होगा, जो तीन मई से टकराएगा. यानी लॉक डाउन की आख़िरी तारीख़ से. सवाल ये कि जिस मुद्दत में कोरोना के मरीज़ों की रफ्तार सबसे ज़्यादा बढ़ने जा रही है, ठीक उसी वक़्त सरकार लॉक डाउन को ख़त्म करने का जोख़िम उठाएगी? हरगिज़ नहीं. तो फिर क्या होगा?

तो तस्वीर का एक दूसरा पहलू भी है. इसे समझते ही लॉक डाउन के भविष्य को आप आसानी से समझ लेंगे. देश में इस वक़्त कोरोना के जो 33 हज़ार मरीज़ हैं, उनमें से एक तिहाई मरीज़ सिर्फ़ 8 राज़्यों से आते हैं, आइए पहले इन राज्यों पर नज़र डाल लेते हैं-

देश में कुल केस 33 हज़ार है.

देश में कुल मौत 1075

महाराष्ट्र में कुल केस 9318 मौत 400

गुजरात में कुल केस 3775 मौत 182

दिल्ली में कुल केस 3315 मौत 54

मध्य प्रदेश में कुल केस 2561 मौत 119

राजस्थान में कुल केस 2365 मौत 51

उत्तर प्रदेश में कुल 2115 मौत 36

तामिलनाडु में कुल केस 2060 मौत 25

आंध्र प्रदेश में कुल केस 1332 मौत 31

यानी इन आठ राज्यों को छोड़ दें, बाकी के राज्यों में कोरोना का क़हर इतना ज़्यादा नहीं है. उन राज्यों में कुछ शर्तों के साथ लॉक डाउन में छूट दी जा सकती है. लेकिन महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान में तो कोरोना मरीज़ों का आंकड़ा हज़ारों में पहुंच चुका है. तो वहीं दूसरी तरफ यूपी, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु जैसे कई राज्यों में भी पॉजिटिव केस आने बंद नहीं हुए हैं. और देश में कोरोना के मौजूदा हालात से लड़ने का लॉकडाउन ही इकलौता हथियार फिलहाल समझ में आ रहा है. कम से कम तब तक जब तक हम कोरोना के मामलों की बाढ़ को संभालने के लिए मेडिकली तैयार नहीं हो जाते.

ऐसे में लॉकडाउन खोलने की सलाह जानकार और कई राज्य सरकारें, केंद्र सरकार को नहीं दे रहे हैं. क्योंकि ये घातक हो सकता है. यूं भी दुनियाभर के एक्सपर्ट कह चुके हैं कि भारत में कोरोना के मामले मई के पहले और दूसरे हफ्ते में अपनी पीक पर पहुंच सकते हैं. ऐसे में अगर लॉकडाउन खुल गया तो फिर हालात संभालना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन हो जाएगा. लिहाज़ा ये मान कर चलिए कि लॉकडाउन फिर बढ़ेगा.

तमाम दुनिया के मुकाबले अगर भारत जैसे 130 करोड़ के देश में कोरोना के मामले अभी तक हज़ारों में है. तो उसकी सिर्फ एक ही वजह है वो है लॉकडाउन. जानकार मानते हैं कि भारत ने वक्त रहते लॉकडाउन लगा दिया. वरना हालात संभाले नहीं संभलते. कोरोना से लड़ने के लिए भारत की इस मुस्तैदी के लिए डब्लूएचओ के साथ साथ पूरी दुनिया तारीफ कर रही है. लेकिन सवाल ये भी है कि आखिर कब तक देश लॉकडाउन में रहेगा. कब तक अर्थव्यवस्था को ताक पर रखकर हिन्दुस्तान थमा रह सकता है. कब तक दिहाड़ी कमाने वालों को काम से दूर रखा जा सकता है. जाहिर है ऐसे में कोई बीच का रास्ता निकालना भी जरूरी है. वरना देश कोरोना से भले बच जाए. मगर भुखमरी से ज़रूर लोग मरने लगेंगे.

तो अब सवाल ये है कि ऐसे हालात में आखिर पीएम नरेंद्र मोदी करेंगे क्या. क्या वो लॉकडाउन खोलने का रिस्क उठाएंगे या फिर लॉकडाउन को और आगे बढ़ाते हुए लॉकडाउन-3 लाएंगे. या फिर लॉकडाउन 3 लगाते हुए रोजमर्रा की जिंदगी जीने के लिए कुछ छूट देंगे? सवाल ये भी है कि अगर लॉकडाउन बढ़ता है तो क्या पूरे देश में लगेगा. या चुनिंदा इलाकों में इसे खोला भी जा सकता है? और अगर लॉकडाउन खुलता है तो किन शर्तों के साथ खुलेगा.

ऐसे में ये जानना ज़रूरी है कि अगर 3 मई के बाद लॉकडाउन को और बढ़ाने का फैसला लिया जाता है तो कैसा होगा लॉकडाउन-3. खबर है कि इस सवाल से पिछले कई दिनों से मोदी सरकार और उनके मंत्री जूझ रहे हैं. और कोई ऐसा रास्ता निकालने की जुगत लगाई जा रही है कि कोरोना भी ना बढ़े. अर्थव्यवस्था भी ना डूबे और लोग भूखे भी ना मरें.

कैसी होगी लॉकडाउन-3 की सूरत?

देश 25 मार्च से लॉकडाउन में है. सब कुछ रुका है. सब कुछ थमा हुआ है. लेकिन अगर कुछ नहीं थमा है तो वो है देश में कोरोना के कहर की रफ्तार. लॉकडाउन के बावजूद कोरोना की मौजूदगी भारत के तकरीबन हर राज्य में नज़र आ रही है कहीं कम कहीं ज्यादा. ऐसे में सवाल ये उठ रहा है कि क्या 40 दिन के सब्र का फल देश की जनता को मिलेगा? हालांकि इस बात के संकेत तो नहीं मिल रहे हैं और ये तकरीबन तय है कि सरकार इस लॉकडाउन बढ़ाएगी ही. हां मगर ये तीसरा दौर पहले की तरह नहीं होने वाला है. केंद्र सरकार की मुख्यमंत्रियों के साथ लॉकडाउन के एग्ज़िट प्लान पर चर्चा हो चुकी है.

कोरोना कमांडोज़ का हौसला बढ़ाएं और उन्हें शुक्रिया कहें…

तो मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक से जो संकेत मिले हैं. उसे देखकर ऐसा लगता है कि 3 मई के बाद भी देश को लॉकडाउन से मुक्ति नहीं मिलने वाली है. हां, लेकिन लॉकडाउन-3 पिछले दो बार की तरह फुल लॉकडाउन बल्कि हाफ लॉकडाउन हो सकता है. वो इसलिए क्योंकि भारत ने पहले के दो लॉकडाउन के दौरान कोरोना को काफी कंट्रोल किया है. पीएम मोदी आगे की तरफ देख रहे हैं.

पीएम ने इस बैठक के बाद कहा कि सामूहिक प्रयासों का नतीजा साफ दिखाई दे रहा है. डेढ़ महीने में हज़ारों जिंदगियां बचाने में कामयाब रहे हैं. जो राज्य ज्यादा प्रभावित हैं, वहां लॉकडाउन जारी रहेगा. राज्यों को ज़ोन बनाकर लॉकडाउन में छूट निर्धारित करें. कोरोना के साथ-साथ अर्थव्यवस्था पर भी नज़र रहेगी. जहां हालात ठीक हैं, वहां जिला स्तर पर भी छूट मिलेगी.

कैसा होगा हाफ लॉकडाउन?

तो आखिर ये हाफ लॉकडाउन कैसा होगा. हम आपको ये बताते हैं. दरअसल बैठक में मौजूद कुछ मुख्यमंत्रियों ने फुल लॉकडाउन को बढ़ाने पर ज़ोर दिया. वहीं कई मुख्यमंत्रियों ने लोगों की तकलीफों को देखते हुए कुछ रियायतों की भी बात की. हालांकि वो भी लॉकडाउन को पूरी तरह खोलने का रिस्क उठाने को तैयार नहीं हैं. देश के ज्यादातर राज्य लॉकडाउन खोलने का रिस्क नहीं लेना चाहते हैं. क्योंकि एक बार कोरोना ने पांव पसारे तो उसकी रफ्तार बेकाबू हो जाएगी. ऐसे में लॉकडाउन से एग्जिट का प्लान क्या होगा.

राज्यों को कोरोना के मामलों के हिसाब से रेड, ऑरेंज और ग्रीन ज़ोन में डाला जाए. जो राज्य कोरोना के रेड ज़ोन में हैं वहां लॉकडाउन बरकरार रखा जाए. राज्यों को सिर्फ उनके ज़ोन के हिसाब से ही लॉकडाउन में छूट निर्धारित की जाए. राज्य रेड ज़ोन को ऑरेंज ज़ोन और फिर उन्हें ग्रीन ज़ोन में बदलने की कोशिश करें.

इसको ऐसे समझिए कि जो रेड ज़ोन हैं, उनका मतलब है कि वो कोरोना से बेहद प्रभावित इलाके हैं. जहां लॉकडाउन जारी रहना चाहिए. वहीं ऑरेंज जोन में वो इलाके आएंगे, जहां कोरोना के मामले तो हैं मगर वे जगहें हॉट स्पॉट नहीं हैं. लिहाज़ा वहां छूट मिल सकती है. जबकि ग्रीन ज़ोन का मतलब है. वो जगह जो कोरोना मुक्त हैं. वहां पर लॉकडाउन से राज्यों को छूट देने को कहा जा सकता है. मगर देश में 3 मई के बाद पूरी तरह से ल़ॉकडाउन खत्म हो जाएगा ऐसा बिल्कुल नहीं होगा.

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