मन की बात में लाल किले की घटना के जिक्र पर छत्तीसगढ़ के सीएम ने सुरक्षा पर उठाया सवाल, कही ये बड़ी बात

लाल किले पर हुए उपद्रव को लेकर छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल ने पीएम नरेंद्र मोदी से पूछे सवाल. (फाइल फोटो)

लाल किले पर हुए उपद्रव को लेकर छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल ने पीएम नरेंद्र मोदी से पूछे सवाल. (फाइल फोटो)

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 26 जनवरी को लाल किले पर हुई घटना पर दुख प्रकट किया तो छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा ‘दिल्ली पुलिस तो केंद्र के अधीन है. लाल किले में कोई आदमी कैसे घुसा ? प्रधानमंत्री को इसका जवाब देना चाहिए.’

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    January 31, 2021, 8:42 PM IST

बिलासपुर. रविवार को मन की बात कार्यक्रम के जरिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) ने 26 जनवरी को लाल किले (Red Fort) पर हुई घटना पर दुख प्रकट किया तो वहीं छत्तीसगढ़ (chhattisagrh) के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (CM Bhupesh Baghel) ने लगे हाथ प्रधानमंत्री की बात पर सवाल खड़े कर दिए. भूपेश बघेल ने कहा कि ‘दिल्ली पुलिस तो केंद्र सरकार के अधीन है. लालकिले में कोई आदमी कैसे घुसा? प्रधानमंत्री को पहले इसका जवाब देना चाहिए.’

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवालिया निशान खड़ा किया. उन्होंने कहा, ‘दिल्ली पुलिस तो केन्द्र सरकार के ही अधीन है. इसके बाद भी इतनी बड़ी घटना को होने दिया गया.’ उन्होंने कहा कि ‘लालकिले की घटना ने पूरे देश को शर्मसार किया है, लेकिन, सवाल यह है जहां 24 घंटे सेना और पुलिस के जवान रहते हैं, वहां कोई घुसकर घंटों कैसे उपद्रव करता रहा? अभी तक उसका कोई पता नहीं है. वह कहां छिपा है. इस घटना के पीछे आंदोलन को बदनाम करने की साजिश लगती है.

भूपेश बघेल ने दीप सिद्धू को लेकर भी कहा कि वह कौन है. उसकी फोटो किन किन नेताओं के साथ सामने आ रही है. वह भाजपा के ही प्रत्याशी का चुनाव एजेंट था. फिर वह पकड़ा क्यों नहीं जा रहा है ? सवाल तो यही है कि इस प्रकार की घटना करके देश के झंडे के साथ भी षडयंत्र करके आंदोलनकारियों को बदनाम करने की कोशिश हुई है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों के साथ उनकी भी एकसूत्री मांग है कि तीनों काले कानून वापस लिए जाएं. ढाई महीने बाद भी सरकार हठधर्मिता कर रही है. उन्होंने कहा कि किसानों को खलिस्तानी या पाकिस्तानी कहने से आंदोलन कमजोर नहीं होगा. इसलिए समय रहते सरकार किसानों की मांग मानकर कानून को रद्द कर दे. यही किसान हित में होगा.







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