मेपकॉस्ट द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस पर ऑनलाइन राष्ट्रीय वेबिनार नवीन पर्यावरण पोर्टल का किया शुभारंभ
पर्यावरण को बचाने के लिए कार्बन उत्सर्जन रोकना जरूरी : मंत्री श्री सखलेचा
नवीन पर्यावरण पोर्टल का किया शुभारंभ
भोपाल : शनिवार, जून 5, 2021, 20:17 IST
पर्यावरण बचाने के लिए कार्बन उत्सर्जन रोकने की दिशा में ध्यान फोकस करने की आवश्यकता है और इस दिशा में प्रयास शुरू हो चुके हैं। सरकारें इस दिशा में निरन्तर आगे बढ़ रही हैं तथा हमें पर्यावरण का शोषण करने से बचना चाहिये। यह बात शनिवार को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा एमएसएमई मंत्री श्री ओमप्रकाश सखलेचा ने विश्व पर्यावरण दिवस पर राष्ट्रीय वेबिनार को संबोधित करते हुए कही।
वेबिनार का आयोजन मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद्, विज्ञान भारती, मध्य भारत प्रांत, पर्यावरण संरक्षण गतिविधि एवं नर्मदा समग्र न्यास के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था। वेबिनार का विषय -‘पारिस्थितिकी तंत्र की पुनः बहाली’था। इस अवसर पर नवीन पर्यावरण पोर्टल का शुभारंभ भी किया गया।
मंत्री श्री सखलेचा ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान पिछले छह महीनों से प्रतिदिन एक वृक्ष लगा रहे हैं, जो यह रेखांकित करता है कि वे पर्यावरण संरक्षण के प्रति अत्यधिक सजग हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री चौहान ने पर्यावरण और अध्यात्म पर वेबिनार कर साधु-संतों और विद्वानों के विचारों को प्रदेशवासियों के बीच पहुँचाया है।
श्री सखलेचा ने कहा कि पर्यावरण प्रेमी श्री अनिल माधव दवे के व्याख्यान प्रेरणादायी और मार्गदर्शन प्रदान करने वाले होते थे।
विज्ञान भारती, नई दिल्ली के राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्री जयंत सहस्त्रबुद्धे ने अतिथि उद्बोधन में कहा कि कोरोना वायरस का फैलाव उन स्थानों पर अधिक हुआ, जहाँ जैव विविधता कम हो चुकी है। लेकिन उन मानव आबादी वाले स्थानों पर जहाँ समृद्ध जैव-विविधता है, कोरोना वायरस का प्रकोप नहीं दिखा। उन्होंने कहा कि इस वर्ष संयुक्त राष्ट्र की थीम ‘पारिस्थितिकी तंत्र की पुर्नबहाली’ ईको सिस्टम रेस्टोरेशन है। यह इस दशक का पहला वर्ष है। आगामी नौ वर्षों तक इसी थीम का विस्तार किया जायेगा। उन्होंने कहा कि मनुष्य पर्यावरण का अंग है। उसे इसके अच्छे संरक्षण पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिये।
अखिल भारतीय पर्यावरण संरक्षण समिति के अध्यक्ष श्री गोपाल आर्य ने कहा कि प्राचीन भारतीय परम्परा में, तीज-त्योहारों में और हमारे राष्ट्र गीत वंदे मातरम में स्वस्थ पर्यावरण पर विशेष जोर दिया गया है। लेकिन अब पर्यावरण असंतुलन चिंता का विषय बन गया है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण को बचाने के लिए छोटे-छोटे प्रयोगों की जरूरत है। ऐसे प्रयोग जिन पर पैसा खर्च नहीं होता।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी ने कहा कि विकास की अनियंत्रित दौड़ और आधुनिक जीवन-शैली से पर्यावरण को क्षति पहुँची है। पर्यावरण को मनुष्य और जीव-जगत के साथ सह-अस्त्त्वि से बचाया जा सकता है।
इस अवसर पर परिषद के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. राकेश कुमार आर्य ने नवीन पर्यावरण पोर्टल की विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने हरित संकल्प के उद्देश्यों से भी अवगत कराया। विज्ञान भारती, भोपाल की अध्यक्ष डॉ. तृप्ता ठाकुर ने स्वागत उदबोधन दिया। पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के श्री अनिल कुमार ने धन्यवाद उदबोधन दिया।
राजेश बैन
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