रायपुर: बीजेपी नेता का आरोप, सरकार ने तय किया किसे, कितने रेट पर और कितना धान देना है

बृजमोहन अग्रवाल ने सरकार पर लगाया बड़ा आरोप.

बृजमोहन अग्रवाल ने सरकार पर लगाया बड़ा आरोप.

छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल (Brijmohan Aggarwal) ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने तय किया हुआ है कि किसे, कितने रेट पर और कितना धान देना है. 

 रायपुर. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में धान और किसान हमेशा से राजनीति के मुद्दे रहे हैं. खेती किसानी की शुरुआत से लेकर अब तक सियासत जारी है. खाद बीज की उपलब्धता, सिंचाई की व्यवस्था, फसल कटाई, धान विक्रय, धान का उठाव, कस्टम मिलिंग तक पर राजनीति होने के बाद अब छत्तीसगढ़ में अतिरिक्त धान पर सियासत गरमाने लगी है. सूबे के पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल (Brijmohan Aggarwal) ने सरकार पर सीधा और बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने तय किया हुआ है कि किसे, कितने रेट पर और कितना धान देना है.

बृजमोहन अग्रवाल का कहना है कि सरकारी फंड को छोड़कर बाकी कितना फायदा होगा उस अनुसार ही निर्णय लिया जाएगा. वहीं यह भी कहा कि सरकार शेष धान के खपत के लिए केवल दिखावा कर रही है. दिखावे के इतर सरकार बिल्कुल भी गंभीर नहीं है.

खाद्य मंत्री ने ली थी समीक्षा बैठक

दरअसल, खाद्य मंत्री अमरजीत भगत ने गुरुवार को खाद्य विभाग की समीक्षा बैठक में शेष धान की यथास्थिति की फाइनल रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे. खाद्य मंत्री अमरजीत भगत ने अपने निवास कार्यालय में सभी जिलों के खाद अधिकारियों की बैठक लेकर कस्टम मिलिंग, धान के रखरखाव, धान की यथास्थिति की विस्तार से समीक्षा की. तकरीबन 2 घंटे चले समीक्षा बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए मंत्री ने कहा कि कस्टम मिलिंग में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं. साथ ही धान के उत्तम रखरखाव के लिए भी निर्देशित किया गया है. वहीं यह भी कहा कि अतिरिक्त धान को सोसाइटी से ही ई-ऑक्शन के जरिए खपत की व्यवस्था की जा रही जिसकी फाइनल रिपोर्ट मांगी गई है. इसके आधार पर ही आगे निर्णय लिया जाएगा.ये भी पढ़ें: प्रकाश जावड़ेकर ने पोस्ट किया राजस्थान का ‘Rape Calendar’, राहुल-प्रियंका गांधी से पूछा बड़ा सवाल

20 लाख मैट्रिक टन अतिरिक्त धान बनी मुसीबत!

राज्य गठन के बाद सरकार ने अब तक का रिकॉर्ड 92 लाख मैट्रिक टन धान की खरीदी की है, जो अब सरकार के गले की फांस बनते जा रही हैं. सेंट्रल पुल में चावल का कोटा नहीं बढ़ाने से परेशान सरकार में प्लान बी और सी तैयार किया है. इसके तहत शेष धान की नीलामी, कस्टम मिलिंग के बाद चावल की नीलामी शामिल है.  बता दें कि राज्य और केंद्रीय कोटे में 70 लाख मेट्रिक टन धान की खपत चावल के रूप में हो जाएगा. अतिरिक्त 20 लाख मैट्रिक टन धान को लेकर सरकार असमंजस की स्थिति में है. अगर केंद्र सरकार राज्य को मदद नहीं देती है तो राज्य सरकार को सीधे तौर पर तकरीबन ढाई हजार करोड़ रुपये का नुकसान होगा.







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