- 40 नेशनल और 3 इंटरनेशनल खेल प्रतियोगिता में हिस्सा ले चुकी हैं नसरीन
- दिल्ली के शकूरपुर में 25 गज के किराए के कमरे में रहता है नसरीन का परिवार
कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया को बदलकर रख दिया है. भारत समेत कई देशों में कोरोना को फैलने से रोकने के लिए लॉकडाउन कर दिया है. सभी खेल कार्यक्रमों को रद्द कर दिया गया है. कोरोना वायरस और लॉकडाउन ने आमजन के साथ-साथ देश के कई खिलाड़ियों को मुश्किल में डाल दिया है. दुनिया में भारत का नाम रोशन करने वाली महिला खो-खो टीम की कप्तान नसरीन शेख के आर्थिक हालात लॉकडाउन की वजह से बेहद खराब हो गए थे.
नसरीन के मुताबिक उनके आर्थिक हालात इतने खराब हो गए थे कि एक समय ऐसा भी आ गया था, जब घर का राशन लगभग खत्म हो गया था. नसरीन की अगुवाई में ही भारत ने नेपाल को हराकर साउथ एशियन गेम्स का गोल्ड जीता था. वो एयरपोर्ट अथॉरिटी के लिए खेलती हैं. हर तीन माह में मिलने वाले लगभग 70 हजार रुपये से ही उनका घर खर्च चलता है.
नसरीन शेख के पिता घूम-घूमकर बर्तन बेचने का काम करते हैं, लेकिन बीते एक माह से जारी लॉकडाउन की वजह से वो भी घर बैठने को मजबूर हैं. घर की आर्थिक स्थिति इतनी खराब है कि 40 नेशनल और 3 इंटरनेशनल खेल प्रतियोगिता में हिस्सा ले चुकीं नसरीन अपनी तय डाइट भी नहीं ले पा रही थीं. जब यह खबर सामने आई, तो भारतीय खो-खो महासंघ (KKFI) उनकी मदद के लिए सामने आया.
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भारतीय खो-खो महासंघ ने 23 वर्षीय नसरीन शेख को एक लाख रुपये की मदद दी. दरअसल, केकेएफआई अधिकारियों को जब नसरीन शेख के बारे में पता चला, तो उन्होंने इस खिलाड़ी के बैंक खाते में एक लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए. नसरीन का परिवार दिल्ली के शकूरपुर में 25 गज के एक किराए के कमरे में रहता है. पिता की आय बंद हो चुकी थी, जिसके चलते परिवार पर आर्थिक संकट का पहाड़ टूट पड़ा था.
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नसरीन शेख ने अपने जीवन में रूढ़िवादी प्रथाओं को तोड़कर हर चुनौतियों का सामना किया. रिश्तेदार खेल के दौरान पहने जाने वाले छोटे कपड़ों को लेकर ताने कसते थे, लेकिन उनके पिता ने इसमें उनका पूरा साथ दिया. इन मुश्किल हालातों में भारतीय खो-खो कप्तान ने अपने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से भी मदद की गुहार लगाई थी. नसरीन शेख ने ट्वीट करते हुए अपनी परेशानी बताई, लेकिन कोई मदद नहीं मिली थी.
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