- लॉकडाउन के कारण कोर्ट नहीं पहुंच पा रहे वकील
- बॉर्डर पर रोके जाने के खिलाफ HC में याचिका दर्ज
बार काउंसिल ऑफ दिल्ली ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की है. इस याचिका में दिल्ली के बॉर्डर से लगे अलग-अलग इलाकों से वकीलों को दिल्ली आने की इजाजत देने की मांग की गई है. याचिका में कहा गया है कि जो वकील नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद, गुड़गांव जैसी जगहों पर रह रहे हैं, वे दिल्ली के अपने दफ्तरों में नहीं आ पा रहे हैं. वकीलों को बॉर्डर पर ही रोका जा रहा है.
इस याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट 12 मई को सुनवाई करने जा रहा है. इससे पहले बार काउंसिल और बार एसोसिएशन की तरफ से दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डीएन पटेल को पत्र लिखकर भी वकीलों ने अपनी समस्याओं से अवगत कराया था. उसके बावजूद समस्या का हल नहीं मिल पाने के बाद बार काउंसिल ऑफ दिल्ली के चेयरमैन केसी मित्तल की तरफ से याचिका हाईकोर्ट में लगाई गई है.
याचिका में कहा गया है कि वकीलों को उनके काम से रोका जा रहा है. उन्हें उनके दफ्तरों तक नहीं पहुंचने दिया जा रहा है. यह वकीलों के मौलिक अधिकारों का हनन है और भारत के संविधान के आर्टिकल 19 (1)(d) और आर्टिकल 301 का उल्लंघन है. वकीलों को उनके दफ्तरों में जाने से रोकना पूरी तरह से गैरकानूनी है. पुलिस या प्रशासन वकीलों को उनके काम करने से या उनके ऑफिस जाने से नहीं रोक सकते.
24 मार्च से हुए लॉकडाउन के बाद से दिल्ली से बाहर रह रहे वकीलों के लिए दिल्ली आना-जाना बंद है. लगभग डेढ़ महीने से जिन वकीलों के घर दिल्ली से बाहर हैं, वे दिल्ली के अपने दफ्तरों तक नहीं पहुंच पाए हैं. वकीलों का कहना है कि उनके दफ्तरों में तमाम दस्तावेज और केस फाइल है. बिना इसके वे ऑनलाइन होने वाली सुनवाई में भी जज के सामने केस से जुड़ी पूरी जानकारी नहीं रख पा रहे हैं, जिससे केस की सुनवाई प्रभावित हो रही है.

