सुकमा के गिरदालपारा में लगे हाईड्रो पावर बेस्ड पंम्पिंग सिस्टम का मुआयना करने पहुंचे मंत्री कवासी लखमा
बैगलुरू के वैज्ञानिक डाक्टर पुनीत सिंह और सुकमा जिला प्रशासन की मेहनत रंग लाई है. यहां पर बिना ईधन के चलने वाली माईक्रोहाईड्रो टरबाइन स्थापित किया गया है जिससे गांव के करीब 50 किसानों की 200 हेक्टेयर खेती सिचिंत की जाऐंगी.
इस तरह काम करता ही है मशीन
डाक्टर पुनीत सिंह ने करीब इस पर 30 साल का काम किया उसके बाद अब जाकर यह अविष्कार करने में सफल हुए है. नाले में बने स्टाप डेम से पाईप के जरिए पानी पास में ही स्थापित टरबाइन मशीन में जाता है. पानी के तेज बहाव के सहारे पानी पाईप की मदद से करीब 22 मीटर लीफ्ट कर डेढ़ किमी. दूर बनी टंकी में स्टोरेज होता है। उसके बाद वहां से केनाल की मदद से पानी को खेतों तक पहुंचाया जाऐंगा। इस तरह यह मशीन काम करती है. ये बिना इधन वाली मशीन है इसलिए किसानों को किसी भी प्रकार का खर्च नहीं करना होगा. जिला प्रशासन ने इस प्रोजेक्ट के लिए करीब 80 लाख खर्च किए है. और यह प्रोजेक्ट लगभग पूरा हो चुका है.
वैज्ञानिक डाक्टर पुनीत सिंह पिछले कई सालों से इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे है. लेकिन सुकमा में महज चार महिनों में यह प्रोजेक्ट बनकर तैयार हो गया है. भले ही जिला प्रशासन ने काफी खर्च किया हो लेकिन करीब 18 लाख की टरबाइन मशीन को वैज्ञानिक पुनीत सिंह ने खुद के खर्च पर लगवाई है. बताया जाता है कि वैज्ञानिक पुनीत सिंह काफी मेहनती और इस प्रोजेक्ट से काफी लगाव है. उन्हे जर्मनी से कई आफर आए लेकिन वो सिर्फ अपने देश में काम करना चाहते हैं.
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