- ACB से पिछले साल अजित पवार को मिली थी क्लीन चिट
- महाराष्ट्र का चर्चित सिंचाई घोटाला करीब 35,000 करोड़ का
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने नागपुर में VIDC (विदर्भ सिंचाई विकास निगम) से संबंधित सिंचाई घोटाले में एक एन्फोर्समेंट केस इन्फर्मेशन रिपोर्ट (ECIR) दर्ज की है. VIDC का मुख्यालय नागपुर में है और सिंचाई विभाग द्वारा गोंदिया, यवतमाल और भंडारा जिलों में किए गए प्रोजेक्ट्स की जांच चल रही है.
सिंचाई घोटाला 2012 के बाद सामने आया. महाराष्ट्र के वर्तमान उपमुख्यमंत्री अजित पवार तब की कांग्रेस-राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की सरकार में महाराष्ट्र के सिंचाई मंत्री (1999 से 2009 तक) थे. यह घोटाला उनके कार्यकाल के दौरान हुआ था.
घोटाले पर जनहित याचिका
एक जनहित याचिका के बाद, महाराष्ट्र पुलिस के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) को इस घोटाले को लेकर मामला दर्ज करने और कथित घोटाले की जांच करने के लिए कहा गया था. इस घोटाले में कथित रूप से 35,000 करोड़ रुपये की अनियमितता बरतने का आरोप है.
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने यवतमाल, भंडारा और गोंडिया के गोसखुर्द परियोजनाओं के संबंध में कुछ सिंचाई परियोजनाओं में मामले दर्ज किए और ठेकेदारों के खिलाफ केस दर्ज किया, जबकि अमरावती और नागपुर में भी मामले दर्ज किए गए.
अजित पवार पर यह आरोप लगा कि अपने कार्यकाल के दौरान वह इन योजनाओं में हुई अनियमितता में शामिल थे. उन पर यह भी आरोप लगे कि अजित पवार ने बढ़े हुए दामों पर परियोजनाएं सौंपी.
एसीबी ने दी क्लीन चिट
हालांकि पिछले साल एसीबी ने अजित पवार को क्लीन चिट दे दी थी. महाराष्ट्र एंटी करप्शन ब्यूरो के महानिदेशक ने पिछले साल दिसंबर में हाई कोर्ट में दायर एक हलफनामे में कहा था कि एसीबी की जांच में विदर्भ सिंचाई विकास निगम (VIDC) के द्वारा किए गए 12 परियोजनाओं में कथित घोटाले में अजित पवार की कोई संलिप्तता नहीं पाई गई.
इस साल जनवरी में, उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने हजारों करोड़ रुपये के सिंचाई घोटाले मामले में दाखिल याचिका के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर खंडपीठ में अपने हलफनामे में इन आरोपों को ‘दुर्भावनापूर्ण’ करार दिया.
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राष्ट्रवादी कांग्रेस नेता (एनसीपी) नेता ने मंगलवार को दायर हलफनामे में यह भी कहा कि वर्तमान जांच को सीबीआई या ईडी को सौंपने की कोई आवश्यकता नहीं है.
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याचिकाकर्ता, जनमंच के अतुल जगताप जिन्होंने कथित घोटाले में 4 जनहित याचिकाएं दायर कर रखी हैं, ने बॉम्बे हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर मामले की सीबीआई जांच की मांग की थी.