सुंदर पिचाई ने सुनाई अपने संघर्ष की कहानी, पिता ने एक साल का वेतन खर्च कर खरीदा था अमेरिका का टिकट

वाशिंगटन: कॉरोना वायरस (Coronavirus) महामारी के बीच, छात्रों को संदेश देते हुए Google के सीईओ सुंदर पिचाई (Sundar Pichai) ने कहा- ‘इन जैसे मुश्किल क्षणों में, उम्मीद करना जरा मुश्किल हो सकता है. लेकिन मैं आपको बताता हूं कि आगे क्या होगा- आप जीतेंगे.’ कोरोना वायरस लाइव स्ट्रीम किए गए इस कार्यक्रम में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और मिशेल ओबामा, सिंगर लेडी गंगा, बेयोंसे और दक्षिण कोरियाई बैंड बीटीएस भी शामिल थे. 

आईआईटी से पढ़ाई करने वाले पिचाई ने स्नातकों को परेशानियों का सामना करने के लिए प्रेरित किया, और इसके लिए उन्होंने पहले हो चुकीं प्रलयकारी घटनाओं का उदाहरण देकर समझाया कि- ‘1920 के छात्रों ने भी घातक महामारी के दौरान स्नातक किया था, 1970 के छात्रों ने भी वियतनाम युद्ध के दौरान स्नातक की उपाधि पाई थी. 2001 के छात्रों ने 9/11 से पहले स्नातक कर लिया था.’

छात्रों को धैर्य न खोने की सलाह देते हुए सुंदर पिचाई ने कहा- ‘इतिहास की ये घटनाएं बताती हैं कि हमें उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए.’

अपनी खुद के संघर्षों को याद करते हुए, पिचाई ने छात्रों से कहा- ‘मेरे पिता ने अमेरिका जाने के हवाई टिकट के लिए अपने एक साल की सैलरी जितना खर्च किया था, ताकि मैं स्टैनफोर्ड में पढ़ सकूं. तब मैंने पहली बार प्लेन में सफर किया था. अमेरिका काफी महंगा था. घर पर कॉल करने के लिए एक मिनट के 2 डॉलर लगते थे. और मेरे बैकपैक की कीमत भारत में मेरे पिता की एक महीने की सैलरी के बराबर थी.’

उन्होंने कहा- ‘तकनीक तक मेरी पहुंच नहीं थी, मैं इसके बिना ही बड़ा हुआ. जब मैं 10 साल का था तब हमें हमारा पहला टेलीफोन मिला था. स्नातक के लिए अमेरिका आने से पहले तक कंप्यूटर भी मेरी पहुंच से दूर था. और जब हमारे पास टेलीविजन आया तब उसमें केवल एक ही चैनल आता था.’




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