- स्वास्थ्यकर्मी था मृतक कोरोना मरीज, परिजनों को मोर्चरी में नहीं मिला शव
- मृतक मरीज के परिजनों ने हॉस्पिटल पर लगाया गड़बड़ करने का आरोप
हैदराबाद के गांधी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्टिपल पर कोरोना मरीज के शव को दफनाने के लिए किसी दूसरे को देने का आरोप लगा है. मृतक कोरोना मरीज के परिजनों का कहना है कि हॉस्पिटल ने गड़बड़ी करके शव को दफनाने के लिए दूसरे को दे दिया. गांधी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल कोरोना के लिए नोडल हॉस्पिटल है.
वहीं, एक कोरोना मरीज की मौत के बाद परिजनों के हमले से नाराज जूनियर डॉक्टर हड़ताल कर रहे हैं. अब दूसरी ओर हॉस्पिटल पर 35 वर्षीय कोरोना मरीज के शव को दूसरे को देने का आरोप लगा है. इस कोरोना पॉजिटिव मरीज की 10 जून को मौत हुई थी. इसके बाद मोर्चरी से कोरोना मरीज का शव लापता हो गया था.
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अब मृतक मरीज के परिजनों को पता चला कि उसका शव दूसरे लोग दफना चुके हैं. मृतक एक स्वास्थ्यकर्मी था, जिनको 8 जून को गांधी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में शिफ्ट किया गया था. हालांकि उनको बचाया नहीं जा सका. इसके बाद प्रशासन ने उनके परिजनों को उनकी मौत की जानकारी दी थी. परिजनों का कहना है कि जब वो हॉस्पिटल के मोर्चरी में पहुंचे, तो शव गायब मिला.
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इससे भी हैरानी की बात यह है कि ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन समेत अस्पताल प्रशासन इस मामले में कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे रहा है. मृतक कोरोना मरीज के अंतिम संस्कार नहीं कर पाने से परिजन नाराज हैं.
उनका कहना है कि पहले अधिकारी आश्वासन दे रहे थे, लेकिन जब हमने दवाब डाला तब पहचान करने के लिए करीब 18 शव दिखाए गए. हालांकि वो सभी शव दूसरों के थे. इसके बाद गुरुवार को मृतक कोरोना मरीज के परिजनों को पता चला कि उनका शव दूसरे परिवार को दे दिया गया है, जो अंतिम संस्कार भी कर चुके हैं.
इसको लेकर मजलिश बचाओ तहरीक के अमजदुल्ला खान ने सरकार पर निशाना साधा है. साथ ही कहा कि ऐसा गड़बड़ी करके न सिर्फ मृतक के परिजनों की भावनाओं के साथ खेला गया है, बल्कि धार्मिक ब्लंडर भी किया गया है. अधिकारियों की गलती की वजह से एक धर्म के व्यक्ति के शव को दूसरे धर्म के लोगों को दफनाने के लिए दिया जा रहा है.
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