अफ्रीकन ‘बोमा’ तकनीक से 176 काले हिरणों का सफल रेस्क्यू, कूनो नेशनल पार्क शिफ्ट किए गए

शाजापुर जिले के शुजालपुर क्षेत्र के बड़ी पोलाय इलाके में वन विभाग ने एक अनूठा और ऐतिहासिक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया है। शनिवार और रविवार को दो दिन चले इस विशेष अभियान में फसलों को नुकसान पहुंचा रहे 176 काले हिरणों को अत्याधुनिक दक्षिण अफ्रीकी बोमा तकनीक से सुरक्षित पकड़कर कूनो नेशनल पार्क के लिए रवाना किया गया इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि पूरी प्रक्रिया में न तो जाल का इस्तेमाल किया गया और न ही हिरणों को बेहोश करने के लिए किसी दवा का उपयोग हुआ। वन विभाग और दक्षिण अफ्रीकी विशेषज्ञों की संयुक्त टीम ने इस ऑपरेशन को पूरी तरह वैज्ञानिक तरीके से अंजाम दिया बड़ी पोलाय और आसपास के गांवों में काले हिरणों की बढ़ती संख्या किसानों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई थी। काले हिरणों के झुंड सोयाबीन समेत अन्य फसलों को बड़े पैमाने पर चट कर रहे थे। इसको लेकर सीएम हेल्पलाइन पर लगातार शिकायतें दर्ज हो रही थीं स्थानीय किसान राहुल मंडलोई ने बताया कि उन्हें 8 बीघा जमीन में 50 क्विंटल सोयाबीन की उम्मीद थी, लेकिन हिरणों के कारण सिर्फ 15 से 16 क्विंटल फसल ही मिल पाई। अब किसानों को एक बीघा में 18 किलो की जगह 25 किलो तक बीज डालना पड़ रहा है, जिससे लागत लगातार बढ़ रही है। इसी समस्या को देखते हुए वन विभाग ने बोमा तकनीक का इस्तेमाल किया। ये दक्षिण अफ्रीका की प्रसिद्ध वाइल्डलाइफ कैप्चर तकनीक है, जिसमें जानवरों को बिना डराए और बिना चोट पहुंचाए पकड़ा जाता है। टीम द्वारा करीब 1किलोमीटर लंबा वी-आकार का अस्थायी कॉरिडोर बनाया जाता है, जिसका शुरुआती मुंह चौड़ा और अंतिम सिरा संकरा होता है। इस गलियारे को लोहे की दीवारों से नहीं, बल्कि हरे-काले पर्दों, घास और झाड़ियों से घेरा जाता है, ताकि हिरणों को किसी खतरे का अहसास न हो उज्जैन सीएफ किरण बिसेन के अनुसार, ऑपरेशन के दौरान हेलिकॉप्टर करीब ढाई से तीन घंटे हवा में रहता है। इसे जरूरत के मुताबिक जमीन से महज 2 से 5 फीट की ऊंचाई पर उड़ाया जाता है। खेतों के बीच आबादी, रास्तों और हाई-टेंशन बिजली लाइनों की मौजूदगी के कारण यह काम बेहद चुनौतीपूर्ण था। हेलिकॉप्टर की मदद से ही हिरणों के झुंड को हांककर वी-आकार के रास्ते से सीधे सुरक्षित ट्रकों के अंदर पहुंचा दिया जाता है रेस्क्यू के दौरान वन्यजीव प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन किया गया। नियमानुसार जैसे ही तापमान 30 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचता है, ऑपरेशन रोक दिया जाता है। अधिक गर्मी और तनाव से हिरणों को कैप्चर मायोपैथी नामक गंभीर बीमारी होने का खतरा रहता है। ट्रकों में नर और मादा हिरणों को अलग-अलग रखा गया ताकि नुकीले सींगों से वे एक-दूसरे को घायल न कर सकें पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ एल. कृष्णमूर्ति के अनुसार, पिछले साल इस अभियान के तहत 847 काले हिरण शिफ्ट किए गए थे। इस वर्ष कुल 2000 हिरणों को शिफ्ट करने का बड़ा लक्ष्य रखा गया है। भविष्य में इसी तकनीक से फसलों को नुकसान पहुंचाने वाली नीलगायों को भी रेस्क्यू करने की योजना है। इस सफल अभियान से जहां एक ओर किसानों को फसल नुकसान से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर काले हिरणों को कूनो नेशनल पार्क में एक सुरक्षित और विशाल प्राकृतिक आवास भी मिलेगा।

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