छतरपुर: राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के आदेश के परिपालन में एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के निर्देशन में शनिवार को जिला न्यायालय छतरपुर सहित जिले के तहसील न्यायालयों में नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। जिला न्यायालय छतरपुर में नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण छतरपुर रविन्द्र सिंह द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।
शुभारंभ अवसर पर विशेष न्यायाधीश निवेदिता मुदगल, प्रधान न्यायाधीश कुटुम्ब न्यायालय राजेश कुमार देवलिया, जिला न्यायाधीश कविता वर्मा, जिला न्यायाधीश आशीष श्रीवास्तव, जिला न्यायाधीश निवेश कुमार जायसवाल, जिला न्यायाधीश निधि सक्सेना, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट स्वाति निवेश जायसवाल सहित न्यायिक अधिकारी उपस्थित रहे। इस अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव वि.प्र. सोलंकी, न्यायिक मजिस्ट्रेट रानो बघेल, श्री राहुल जैन, सोनम डेहरिया, हर्षा परमार, संघशिखा वंशकार, संतोष कुशवाहा एवं सुश्री आयुषी रघुवंशी सहित अभिभाषक संघ के सदस्य, जिला अभियोजन अधिकारी प्रवेश अहिरवार, जिला विधिक सहायता अधिकारी डॉ. वीरेन्द्र चढ़ार, चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल रमाशंकर तिवारी, पैनल लॉयर बलजिंदर सोढी, राजेन्द्र शर्मा, जिला न्यायालय एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कर्मचारी तथा पक्षकार उपस्थित रहे।
28 खण्डपीठों के माध्यम से हुआ प्रकरणों का निराकरण
नेशनल लोक अदालत के लिए जिला न्यायालय एवं जिले के तहसील न्यायालयों में कुल 28 खण्डपीठों का गठन किया गया था। गठित खण्डपीठों द्वारा पक्षकारों की सहमति एवं आपसी सुलह-समझौते के आधार पर विभिन्न प्रकरणों का निराकरण किया गया। इनमें आपराधिक प्रकरण, चैक बाउंस से संबंधित प्रकरण, मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण, विद्युत प्रकरण, वैवाहिक एवं अन्य प्रकृति के प्रकरण शामिल रहे। लोक अदालत में निराकृत लंबित प्रकरणों में कुल 12 करोड़ 26 लाख 66 हजार 986 रुपये का अवार्ड पारित किया गया। इन प्रकरणों के निराकरण से कुल 2380 व्यक्ति लाभांवित हुए।
प्री-लिटिगेशन के 1327 प्रकरणों का निराकरण
लोक अदालत में न्यायालय में प्रकरण दर्ज होने से पूर्व के प्री-लिटिगेशन प्रकरणों का भी आपसी सुलह एवं समझौते के माध्यम से निराकरण किया गया। कुल 1327 प्री-लिटिगेशन प्रकरणों का निराकरण किया गया। इनमें बैंक संबंधी 125 प्रकरण, विद्युत संबंधी 163 प्रकरण, वाटर बिल के 760 प्रकरण तथा अन्य प्रकृति के 279 प्रकरण शामिल रहे। इन प्रकरणों में कुल 1 करोड़ 25 लाख 61 हजार 193 रुपये के अवार्ड पारित किए गए तथा 1570 व्यक्ति लाभांवित हुए। इस प्रकार लोक अदालत ने विवादों के त्वरित समाधान के साथ पक्षकारों को समय एवं धन की बचत का अवसर भी उपलब्ध कराया।*समझाइश से फिर साथ आए पति-पत्नी, बचा परिवार* नेशनल लोक अदालत में पारिवारिक विवादों के प्रकरणों में समझाइश एवं आपसी सहमति के माध्यम से परिवारों को टूटने से बचाने के प्रयास भी सफल रहे। कुटुम्ब न्यायालय में लंबित ग्राम गढ़ीमलहरा, जिला छतरपुर निवासी परिवर्तित नाम भैयालाल रेकवार एवं रामरति रेकवार के प्रकरण में लगभग चार वर्ष पूर्व हुए विवाह के बाद पति-पत्नी के बीच विवाद उत्पन्न हो गया था। विवाद के चलते दोनों अलग-अलग जीवन व्यतीत कर रहे थे। मामले में आवेदक द्वारा हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 9 के अंतर्गत जिला न्यायालय छतरपुर में आवेदन प्रस्तुत किया गया था। पारिवारिक प्रकृति का मामला होने के कारण इसे लोक अदालत में रखा गया। लोक अदालत की प्रीसिटिंग के दौरान दोनों पक्षों को समझाइश दी गई। समझाइश के फलस्वरूप पति-पत्नी आपसी मतभेद भुलाकर साथ रहने के लिए सहमत हुए। दोनों खुशी-खुशी लोक अदालत से साथ विदा हुए।
पांच वर्ष से अलग रह रहे दंपति ने भी शुरू किया साथ रहने का नया सफर
इसी प्रकार ग्राम एवं तहसील छतरपुर निवासी परिवर्तित नाम रहीम पिता हाशिम एवं सकीना के बीच लगभग पांच वर्ष पूर्व मुस्लिम रीति-रिवाज से विवाह हुआ था। विवाह के कुछ समय बाद पारिवारिक कारणों से दोनों के बीच विवाद उत्पन्न हो गया और पत्नी वर्ष 2025 में अपने मायके चली गई थी। मामले में आवेदक द्वारा अपनी पत्नी को साथ ले जाने के लिए जिला न्यायालय छतरपुर में आवेदन प्रस्तुत किया गया था। मामला पारिवारिक प्रकृति का होने के कारण लोक अदालत में रखा गया। लोक अदालत में दोनों पक्षों को समझाइश दी गई। समझाइश एवं आपसी संवाद के बाद पति-पत्नी ने अपने मतभेद समाप्त कर आपसी सहमति से पुनः साथ रहने का निर्णय लिया।
लोक अदालत के माध्यम से हुए इस समझौते से एक परिवार को बिखरने से बचाने में सफलता मिली। दोनों पक्ष खुशी-खुशी साथ लोक अदालत से विदा हुए।*फूल माला पहनाकर जताई खुशी, न्याय के प्रतीक के रूप में मिला पौधा* इन दोनों पारिवारिक प्रकरणों में राजीनामा होने के बाद पति-पत्नी ने एक-दूसरे को फूलों की माला पहनाकर साथ रहने की सहमति पर खुशी व्यक्त की। इस अवसर पर उन्हें न्याय, सौहार्द और नए जीवन की शुरुआत के प्रतीक स्वरूप पौधा भी प्रदान किया गया। नेशनल लोक अदालत में हुए इन समझौतों ने यह संदेश दिया कि आपसी संवाद, समझाइश और सुलह-समझौते के माध्यम से न केवल विवादों का समाधान संभव है, बल्कि परिवारों को टूटने से भी बचाया जा सकता है।


