इंदौर के जिला कोर्ट में एक 34 वर्षीय व्यक्ति को दुष्कर्म जैसे गंभीर मामले में बरी कर दिया है वही पूरा ही मामला काफी दिलचस्प है और कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद इस पूरे मामले में आरोपी युवक को सबूत के अभाव में बरी कर दिया।वि ओ -पूरा मामला इंदौर के भवरकुआ थाना क्षेत्र का है पुलिस ने क्षेत्र में रहने वाले एक युवक पर 27 जुलाई 2021 को रेप सहित विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज किया था
बता दे पुलिस को शिकायत करते हुए पीड़िता ने बताया कि उसकी जान पहचान इंस्टाग्राम के माध्यम से एक युवक से हुई थी इस दौरान युवक को इस बात की भी जानकारी दी कि वह शादीशुदा है लेकिन यदि वह साथ में रहना चाहती है तो एक कॉन्ट्रैक्ट कर लिया, इस कॉन्ट्रैक्ट में साफ शब्दों में युवती ने लिखवाया कि वह युवक अपनी पति के पास सिर्फ सात दिन के लिए जा सकता है ओर इस दौरान यदि में उसके साथ जाना चाहु तो युवक मुझे ले जाने में आपत्ति नहीं लेगा, ,वही युवती एक हॉस्टल के वार्डन के पद पर पदस्थ थी। इसके बाद युवक कॉन्ट्रैक्ट करके युवती के साथ रहने लगा लेकिन इसी दौरान युवती गर्भवती हो गई तो युवती ने युवक पर शादी करने का दबाव बनाया जिस पर युवक ने मना कर दिया इसके बाद युवती ने पूरे मामले की शिकायत भंवरकुआ पुलिस को कर दी और भंवरकुआ पुलिस ने इस पूरे मामले में युवक के खिलाफ दुष्कर्म सहित विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज कर गिरफ्तार कर जेल भेज दिया वहीं इसके बाद इस पूरे मामले में पूरा मामला कोर्ट के समक्ष पेश किया और कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद इस पूरे मामले में आरोपी युवक को बरी कर दिया , वहीं अपर सत्र न्यायाधीश जयदीप सिंह ने तथ्यो और सबूत पर गौर करने के बाद उक्त व्यक्ति को भारतीय दंड विधान की धारा 376 धारा 313 और धारा 506 के आरोप में बरि कर दिया,
वही कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी लिखा कि प्रकरण दर्ज करवाने वाली महिला ने इस व्यक्ति के साथ 15 जून 2021 को बाकायदा अनुबंध किया था जिसमें साफतौर पर लिखा है कि आरोपी पहले से शादीशुदा है और वह एक हफ्ते अपनी पत्नी और बच्चों के साथ रहेगा वहीं युवती और युवक के बीच तकरीबन 2 सालों से प्रेम संबंध है साथ ही कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी लिखा की लिव इन संबंध किसी जोड़े का बिना शादी के साथ रहने के दौरान महिला और इस व्यक्ति ने सहमति से शारीरिक रिश्ते बनाए थे और यह सब पहले से शादीशुदा होने के कारण उसके साथ विवाह की स्थिति में नहीं था अदालत ने इस व्यक्ति को आरोप में बरी करते हुए कहा ऐसी स्थिति में इस व्यक्ति को बलात्कार और जबरन गर्भपात का दोषी नहीं ठहराया जा सकता जहां तक शिकायतकर्ता को जान से मारने की धमकी दी जाने के संबंध में है इस सिलसिले में पुलिस की ओर से किसी तरह के कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए और इन्हीं तर्को ओर साक्ष्य को देखते हुए कोर्ट ने आरोपी युवक को बरी कर दिया।बा
इट – सोनाली गुप्ता, एडवोकेट, आरोपी पक्ष


