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64वां जन्म दिवस (05 मार्च) विशेष : संकल्प से सिद्धि की मिसाल रचते शिवराज सिंह चौहान

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भोपाल, ब्यूरो। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपना 64 वां जन्मदिन मना रहे हैं। 13 साल की उम्र में संगठन से जुड़े शिवराज सिंह आज के दौर में सत्ता और संगठन दोनों की पहली पसंद हैं। चौथी बार प्रदेश के मुख्यमंत्री की बागडोर संभाल रहे शिवराज के नाम प्रदेश के सबसे ज्यादा लंबे समय तक, और सबसे ज्यादा बार सीएम बनने का रिकॉर्ड है। उनके जन्मदिन के मौके पर आपको बताते हैं उनके पांव-पांव वाले भैया से मामा शिवराज बनने तक सफर…
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का जन्म सीहोर जिले के छोटे से गांव जैत में 5 मार्च 1959 को हुआ था। भोपाल में शुरुआती पढ़ाई की, महज 13 साल की उम्र में वे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़ गए। किसान पुत्र शिवराज सिंह चौहान आगे चलकर प्रदेश की बागडोर संभालेंगे, ये शायद उन्होंने भी नहीं सोचा होगा। लेकिन सत्ता में उनकी रुचि उनके स्कूली दिनों में दिख गई थी। पढ़ाई के दौरान वे मॉडल स्कूल छात्र संघ के अध्यक्ष बने.. अपने कॉलेज के दिनों में शिवराज सिंह चौहान बीजेपी की छात्र विंग अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े और 1977-78 के दौर में एबीवीपी की भोपाल इकाई के सचिव बने, 1978 से 80 के बीच संयुक्त सचिव बने और 1980-82 में एबीवीपी के प्रदेश मंत्री बने। उनका सफर यही नहीं रुका, शिवराज 1982-83 में एबीवीपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य नियुक्त किए गए। शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल के बरकतुल्ला विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र में एमए किया है। वे दर्शन शास्त्र में गोल्ड मेडलिस्ट हैं। शिवराज सिंह चौहान ने 1990 में अपने राजनैतिक करियर की शुरुआत बुधनी से की। यहां से वे पहली बार विधायक बने, लेकिन कुछ ही महीनों बाद उन्होंने विधायक के पद से इस्तीफा दे दिया। पार्टी ने उन्हें विदिशा लोकसभा सीट से टिकट दिया और वे यहां से 10वीं लोकसभा के सांसद बने। 1992 में उन्हें संगठन ने बीजेपी का महासचिव बनाया। वहीं इसी साल उन्होंने साधना सिंह से शादी की। वे 1992 से 1994 तक बीजेपी के महासचिव रहे। पार्टी ने 1996 में 11वीं लोकसभा के लिए फिर उन पर भरोसा जताया और उन्हें विदिशा से टिकट दिया। वे यहां से लगातार 5 बार सांसद चुने गए। 2005 में मध्य प्रदेश बीजेपी का अध्यक्ष बनने के साथ उन्होंने प्रदेश की राजनीति में वापसी की। 29 नवंबर 2005 को वे पहली बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। इसके बाद 12 दिसंबर, 2008 को दूसरी बार और 14 दिसंबर 2013 को वह तीसरी बार प्रदेश के मुखिया बने, 12 दिसंबर 2018 तक वे इस पद पर काबिज रहे। कुछ समय के लिए प्रदेश की सत्ता कांग्रेस के हाथ में गई लेकिन 13 मार्च 2020 को फिर बीजेपी सत्ता में आई और चौथी बार शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। शिवराज सिंह चौहान प्रदेश के एक ऐसे जननेता के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं, जो संगठन से लेकर सत्ता तक लोगों को साधने का हुनर जानता है। वे सिर्फ वोट नहीं बल्कि लोगों के दिलों को भी जीतना जानते हैं। आत्मनिर्भर भारत की तर्ज पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश बनाने की संकल्पना रखी। वे प्रदेश में कृषि को आधार बनाकर मध्य प्रदेश को मजबूती प्रदान करने की दिशा में अग्रसर हैं। वहीं, युवाओं को रोजगार देने और प्रदेश में महिलाओं की स्थिति सुधारने के लिए भी वे प्रदेश में ही उद्योगों को स्थापित करने कदम आगे बढ़ा रहे हैं। किसान पुत्र होने के नाते शिवराज सिंह चौहान किसानों के दर्द को अच्छी तरह समझते हैं। प्रदेश का किसान जब भी पीड़ा में होता है, शिवराज संकटमोचन बन कर उनका दुख-दर्द बांटने पहुंच जाते हैं। प्रदेश में लगातार घटती बेटियों की संख्या में सुधार के लिए मुख्यमंत्री बनते ही उन्होंने लाड़ली लक्ष्मी योजना शुरू की। जिसका सकारात्मक असर दिखाई दिया…महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध सीएम शिवराज अब लाडली बहना योजना शुरू कर रहे हैं। उन्होंने महिला स्वसहायता समूहों के जरिए महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया है। आदिवासी महोत्सव हो या होली मिलन, दीपावली हो या क्रिकेट का मैदान शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए भी हर रंग में रंग जाने वाले नेताओं में शुमार हैं। शिवराज सिंह चौहान ऐसे पहले नेता हैं जो अपने दिन की शुरुआत एक पेड़ लगाकर करते हैं। वे खुद तो पेड़ लगाते ही हैं दूसरों को भी पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करते हैं। पर्यावरण बचाने और वृक्षारोपण करने के लिए वे एक मिसाल बन चुके हैं। शिवराज सिंह चौहान भले ही 64 साल के हो गए हों, लेकिन अब भी वे एक युवा नेता की तरह जोशीले हैं। घंटों सभाएं करना, पैदल यात्राएं करना। किसी भी काम को करने से वे पीछे नहीं हटते। राजनैतिक करियर के सफल 33 साल पूरे करने के बाद भी लोग उन्हें पांव-पांव वाले भैया के अंदाज से जानते हैं और बच्चे ‘मामाजी’ के नाम से..
प्रदेश के संवेदनशील मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सच में संकल्प के धनी हैं…गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों में बेटी की शादी माता पिता के लिए सबसे बड़ी चिंता होती है, इसी चिंता को दूर करते हुए मुख्यमंत्री बनने के बाद शिवराज सिहं चौहान ने सबसे पहले मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना बनाई…जिसमें अब तक लाखों बेटियों के विवाह हो चुके हैं…इसके बाद उन्होंने 1 एक अप्रैल 2007 को लाडली लक्ष्मी योजना बनाई, जिससे अब तक 45 लाख से ज्यादा लाडलियां लखपति बन चुकी हैं। महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए संकल्पित मामा शिवराज ने उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए लाडली बहना योजना बनाई है, जिसमें बहनों के खाते में हर महीने एक हजार रुपए डाले जाएंगे। एक नहीं ऐसे कई संकल्प हैं जिसे सीएम शिवराज सिद्ध कर रहे हैं…उन्हीं में से एक है नदी जोड़ो परियोजना…जो कभी कहते थे कि जीवनदायिनी नर्मदा का जल क्षिप्रा नदी में नहीं मिल सकता…इसे कर दिखाया सीएम शिवराज ने…चाहे कोविड के दौरान अपनों को खो चुके बच्चों के लिए मुख्यमंत्री कोविड बाल सेवा योजना हो या फिर मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना…सीएम शिवराज ने ऐसी कई योजनाएं बनाई हैं जिन्हें दूसरे राज्यों ने भी लागू किया है। पर्यावरण के लिए अपना संकल्प निभाते हुए शिवराज दो साल से ज्यादा समय से प्रतिदिन पौधरोपण कर रहे हैं…अनोखे संक्लप को पूरा करने वाले दुनिया के अकेले राजनेता हैं…
शिवराज सिंह चौहान राजनायक से जननायक बन गए हैं…वो ऐसे मुख्यमंत्री हैं जो सत्ता की कुर्सी पर नहीं घर-आंगन,.गली-मोहल्लों..गांव से शहरों तक लोगों के दिलों में बसते हैं…देश में उन जैसा कोई मुख्यमंत्री नहीं…शायद ही किसी मुख्यमंत्री ने गरीब की कुटिया में भोजन किया हो..शायद ही किसी मुखिया ने सफाई कर्मियों के साथ अपना जन्मदिन मनाया हो…शायद ही किसी सीएम ने निराश्रित बच्चों के साथ दिवाली के दिए जलाएं हो…ये सीएम शिवराज ही हैं जो प्रदेश की जनता को अपना परिवार मानकर उनके हर सुख-दुख में उनके साथ खड़े रहते हैं…और कहते हैं चिंता न करें…मामा है न…

सीएम शिवराज द्वारा शुरू की गई कुछ महत्वपूर्ण योजनाएं

  • सबसे पहले मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना बनाई
  • लाडली लक्ष्मी योजना ने लोगों की सोच बदली
  • लाडली लक्ष्मी योजना महिलाओं को देगी संबल
  • तीर्थ दर्शन योजना को दूसरे राज्यों ने लागू किया
  • नदी जोड़ो योजना का संकल्प भी पूरा
  • पर्यावरण योद्धा शिवराज प्रतिदिन कर रहे पौधरोपण
  • सीएम शिवराज जैसा कोई नहीं…
  • नागरिकों के सुख-दुख के साथी
  • मामा शिवराज हैं न…

शिवराज की राजनीतिक ‘पाठशाला’

  • मॉडल स्कूल छात्र संघ के अध्यक्ष बने
  • 1977-78 में एबीवीपी की भोपाल इकाई के सचिव बने
  • 1978-80 तक एबीवीपी के संयुक्त सचिव रहे
  • 1980-82 में एबीवीपी के प्रदेश मंत्री बने
  • 1982-83 में एबीवीपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य बने

शिवराज का राजनीतिक सफर

  • 1990 में बुधनी से विधायक बने
  • 1991 से 2004 तक विदिशा से लगातार 5 बार सांसद चुने गए
  • 2002 में बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव बनाए गए
  • 2003 में बीजेपी महासचिव बने
  • 2005 में पहली बार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बने

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