- तीन हफ्तों से बना रही हैं ट्रिपल लेयर फेस मास्क
- रोज तैयार कर बांटती हैं 50-70 राशन के पैकेट
कोरोना वायरस के प्रकोप को देखते हुए देशव्यापी लॉकडाउन है. कई लोग ऐसे भी हैं जिनके सामने खाने-रहने तक की दिक्कत हो गई है. ऐसे लोग मास्क के बारे में सोच भी नहीं सकते. हालांकि इन लोगों की मदद के लिए अब कई लोग सामने आ रहे हैं. लखनऊ के राजेंद्र नगर कॉलोनी में रहने वाली 85 साल की कुमुद बाजपेई, अपने पेंशन के पैसों से लोगों के लिए फेस मास्क सिल रही हैं. साथ ही प्रत्येक दिन 50-70 खाने के पैकेट भी बांटती हैं. इस काम में उनके परिवार के अन्य लोग भी उनकी मदद करते हैं.
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देश में जब से लॉकडाउन लागू है तब से ही वो मास्क बनाने के काम में जुटी हैं. आजतक से बात करते हुए कुमुद बाजपेई ने कहा कि इस संकट के हालात में प्रत्येक देशवासियों का कर्तव्य है कि वो जरूरतमंदों की मदद करें. मैं पिछले तीन हफ्तों से ट्रिपल लेयर फेस मास्क बना रही हूं और स्थानीय जरूरतमंद लोगों के बीच बांट भी रही हूं.
उन्होंने कहा कि मास्क के साथ-साथ हमलोग हर रोज हमलोग 50-70 फूड्स पैकेट भी तैयार कर रहे हैं. मेरे परिवार के लोग खुद ही बाहर जाकर स्थानीय जरूरतमंद लोगों के बीच इसे बांटने का काम करते हैं.
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उन्होंने आगे कहा, “मेरे पति एलआईसी में थे. उनकी मौत के बाद से मुझे हर महीने 10,000 रुपये पेंशन में मिलते हैं. मैं पहले की सेविंग्स और पेंशन के पैसों से कपड़े खरीदती हूं. साथ ही घर पर सिलाई मशीन से सिलने का काम भी करती हूं. प्रत्येक दिन मास्क बनाने और लोगों के लिए राशन खरीदने में 3000-4000 रुपये खर्च हो रहे हैं. फिलहाल मैं लोगों की खुद से मदद करने में सक्षम हूं. इसलिए मैंने निश्चय किया है कि जब तक लॉकडाउन जारी है मैं जरूरतमंदो की मदद करती रहूंगी.”
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उनकी बहु स्मिता कहती हैं, ‘आज के लिए राशन के पैकेट तैयार हो गए हैं. हमलोग इसे बांटने के लिए भेजने वाले हैं. आसपास के जो भी जरूरतमंद हैं उनके बीच इसे बांटा जाएगा. यह बेहद जरूरी है कि संकट के इस हालात में लोग गरीब और जरूरतमंदो की मदद के लिए आगे आएं.’