चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के उद्देश्य से बनाया गया क्वाड (QUAD) गठबंधन अब पहले जैसा मजबूत दिखाई नहीं दे रहा है। अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के इस रणनीतिक समूह को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या यह गठबंधन अपने मूल उद्देश्य से भटक चुका है या फिर वैश्विक राजनीतिक परिस्थितियों के दबाव में कमजोर पड़ रहा है।
अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio आज भारत दौरे पर हैं और नई दिल्ली में क्वाड देशों की बैठक में हिस्सा लेने वाले हैं। हालांकि, इस बैठक से पहले ही QUAD की स्थिति को लेकर कई तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं। पिछले डेढ़ साल में दुनिया भर में तेजी से बदले जियो-पॉलिटिकल समीकरणों ने इस गठबंधन की चुनौतियों को खुलकर सामने ला दिया है।
दरअसल, पिछले वर्ष QUAD शिखर सम्मेलन भारत में आयोजित होना था, लेकिन वह नहीं हो पाया। वहीं इस साल ऑस्ट्रेलिया में भी शिखर सम्मेलन के आयोजन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि सदस्य देशों के बीच पहले जैसी सक्रियता और समन्वय नहीं रह गया है।
QUAD की शुरुआत 2007 में चीन के बढ़ते दबदबे को संतुलित करने के लिए की गई थी। बाद में 2017 में अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने अपने पहले कार्यकाल में इसे नई धार दी। इसके बाद Joe Biden प्रशासन ने QUAD को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के खिलाफ एक मजबूत रणनीतिक मंच के रूप में आगे बढ़ाया।
लेकिन अब हालात बदलते दिखाई दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और भारत के रिश्तों में हाल के महीनों में आई खटास और ट्रंप प्रशासन की नीतियों में लगातार दिखाई देने वाली अस्थिरता ने QUAD की ताकत को प्रभावित किया है।
इसके अलावा QUAD की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी संरचना को भी माना जा रहा है। यह कोई सैन्य गठबंधन नहीं है और न ही इसके पास NATO जैसी स्पष्ट सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था है। चारों देशों के अपने-अपने आर्थिक और रणनीतिक हित हैं, जिनमें कई बार टकराव भी देखने को मिलता है। यही वजह है कि चीन के खिलाफ साझा रणनीति बनाने में यह समूह अक्सर सीमित नजर आता है।
विश्लेषकों का कहना है कि QUAD अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, लेकिन उसकी प्रभावशीलता पहले जैसी नहीं रही। आने वाले समय में यह गठबंधन कितनी मजबूती से खुद को पुनर्गठित कर पाता है, यह काफी हद तक अमेरिका-भारत संबंधों और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की बदलती राजनीति पर निर्भर करेगा।


