एर्दोगन का बड़ा दावा: मिस्र भी शामिल हो सकता है मक्का डिफेंस एग्रीमेंट में, ‘इस्लामिक NATO’ की चर्चा तेज

तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने कहा है कि मिस्र भविष्य में मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट में शामिल हो सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि समझौता अन्य इच्छुक देशों के लिए भी खुला है। फिलहाल इस समझौते में तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान शामिल हैं। 7 अगस्त 2026 को हुए इस समझौते में प्रावधान है कि किसी सदस्य देश पर सशस्त्र हमला होने की स्थिति में उसे सभी सदस्य देशों पर हमला माना जाएगा। यह व्यवस्था NATO के आर्टिकल-5 जैसी सामूहिक रक्षा व्यवस्था से तुलना का आधार बनी है। इसी वजह से इसे कुछ विश्लेषकों और मीडिया रिपोर्टों में ‘इस्लामिक NATO’ या ‘मुस्लिम NATO’ कहा जा रहा है, हालांकि यह आधिकारिक नाम नहीं है और इसकी वास्तविक सैन्य भूमिका अभी स्पष्ट रूप से विकसित होनी बाकी है। मिस्र की संभावित सदस्यता पर चर्चा के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों में इस समझौते के विस्तार को अहम घटनाक्रम माना जा रहा है।

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