ईश्वर न्यूज 18 से बातचीत में कहते हैं, ‘लॉकडाउन के पहले चरण में 14 अप्रैल तक मैंने साथियों संग संयम रखा, लेकिन फिर 15 अप्रैल को सब्र टूट गया. मैं अपने 5 साथियों के साथ नागपुर से सोनभद्र के लिए पैदल ही निकल गया. रास्ते की खास जानकारी नहीं थी, इसलिए नेशनल हाईवे से ही जाना तय किया गया.’
सबसे ज्यादा प्रभावित महाराष्ट्र
छत्तीसगढ़ के पड़ोसी राज्यों में महाराष्ट्र कोरोना वायरस के संक्रमण से सबसे ज्यादा प्रभावित है. सरकार का दावा है कि राज्य की सीमावर्ती इलाकों को पूरी तरह सील कर दिया गया है. मृत्यु और स्वास्थ्य से जुड़े गंभीर मामलों को छोड़ कर किसी को भी छत्तीसगढ़ की सीमा में प्रवेश पर सख्त रोक का दावा किया जा रहा है. प्रशासन का दावा है कि यदि कोई जरूरतमंद सीमा पार करने की कोशिश कर रहा है, तो उसे सीमावर्ती इलाकों में ही समाजिक संगठनों की मदद से सरकार द्वारा संचालित राहत शिविरों में रखा जा रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि ईश्वर और उनके साथ नागपुर से करीब 283 किलोमीटर का पैदल सफर कर रायपुर कैसे पहुंच गए?
लाभांडी के आश्रय शिविर में भोजन करते वहां ठहरे लोग.
चेकपोस्ट पर रोका, लेकिन…
महाराष्ट्र के सीमावर्ती जिले राजनांदगांव की बाग नदी का जिक्र करते हुए ईश्वर बताते हैं कि नदी के किनारे पुलिस के जवानों ने रोका था. चेकपोस्ट के पास ही कुछ देर बैठाए रखा, जवानों ने खाने के लिए केला दिया. कुछ देर बैठने के बाद वे निकल गए. ईश्वर बताते हैं कि चेकपोस्ट पर कई लोग रुके थे. गाड़ियों से आने वालों की विशेष जांच हो रही थी. इसके बाद लगातार चलते रहे. कहीं उन्हें नहीं रोका गया. जब राजधानी रायपुर पहुंचे तो उन्हें पुलिस ने रोक लिया और पूछताछ की. इसके बाद यहां आश्रय शिविर में लाया गया.’
नागपुर से साइकिल से कोंडागांव पहुंचे युवक.
नागपुर से साइकिल से पहुंचे कोंडागांव
एक अन्य मामले में 21 अप्रैल को बस्तर संभाग के कोंडागांव के आमाडीह प्रथमिक शाला में बने क्वारंटाइन सेंटर में रखा गया है. स्थानीय प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक संतूराम, गितेश, सुरेश समेत 8 लोग साइकिल से नागपुर से कोंडागांव पहुंचे थे. कोंडागांव में इन्हें रोका गया. अब ये प्रशासन की निगरानी में हैं. इन लोगों ने प्रशासन को बताया कि लॉकडाउन में परेशानी के कारण वे नागपुर नहीं रहना चाहते थे. इसलिए साइकिल से निकल गए. इन्होंने जंगली रास्तों का इस्तेमाल भी किया. बस्तर के दूसरे सीमावर्ती जिलों सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर में भी लॉकडाउन के बावजूद बड़ी संख्या में मजदूर दूसरे राज्यों से यहां पहुंच रहे हैं.
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..तो कितनी नजर रखें?
राजनांदगांव जिले में कोरोना संबंधी मामलों की नोडल अधिकारी सुरेशा चौबे का कहना है- ‘दूसरे राज्यों से आने वाले लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा के लिहाज से छत्तीसगढ़ में प्रवेश की मनाही है. मृत्यु और स्वास्थ्य से जुड़े गंभीर मामलों में ही लोगों की पूरी जांच के बाद प्रदेश की सीमा में प्रवेश होने की अनुमति दी जा रही है.’
ईश्वर और उनके साथियों का उदहारण देते हुए सवाल करने पर जिले की एडिशनल एसपी सुरेशा कहती हैं- ‘प्रशासन की ओर से पूरी सतर्कता और गंभीरता बरती जा रही है. राजनांदगांव जिले के ही राहत शिविरों में लॉकडाउन में फंसे 916 लोगों को रोका गया है. इनके भोजन से लेकर ठहरने तक की पूरी व्यवस्था की गई है. फिर भी कोई छिप कर निकल जाए तो कितनी नजर रखें, क्योंकि ये कोई अपराधी नहीं हैं?’
आश्रय शिविर में लगा बोर्ड.
दूसरे राज्यों के 155 लोगों को आश्रय
रायपुर के लाभांडी आश्रय शिविर में सेवा दे रहे वी द पीपल संस्था के संदीप यादव बताते हैं कि ’21 अप्रैल तक की स्थिति में कुल 282 लोग यहां रूके हैं. इनमें से 155 दूसरे राज्यों के हैं. इनमें से ज्यादातर लोग लॉकडाउन में अपने घर पहुंचने के लिए निकले थे, लेकिन सुरक्षा और स्वास्थ्य कारणों से इन्हें रोक लिया गया. संदीप दावा करते हैं कि आश्रय शिविर में लोगों को समय पर भोजन की व्यवस्था तो की ही गई है, साथ ही इनके मनोरजंगन के लिए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए खेल भी कराए जा रहे हैं.’
लाभांडी के शिविर में व्यायाम करते लोग.
लाभांडी आश्रय शिविर में भोजन का इंतजाम करने वाली संस्था समर्थ चैरिटेबल ट्रस्ट की मंजीत कौर बल का कहना है- ‘इस शिविर में अलग-अलग राज्यों के लोग हैं. राज्य की सीमा तो क्या, ज़िलों की सीमा में भी प्रवेश के नियम नहीं हैं. कई जगह लोगों को उनके ज़िलों में पहुंचने के बाद भी रोक दिया गया. यह थोड़ा असुविधाजनक हो सकता है लेकिन स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से यह ज़रुरी है.’
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