कटनी जिले के स्लीमनाबाद में बनी देश की सबसे लंबी भूमिगत जल सुरंग अब पूरी तरह तैयार है। 17 जुलाई को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस ऐतिहासिक परियोजना का उद्घाटन करेंगे। करीब 12 किलोमीटर लंबी यह वाटर टनल बरगी व्यपवर्तन परियोजना का हिस्सा है, जिसके जरिए पहली बार नर्मदा का पानी बिना पंप के प्राकृतिक ढाल से विंध्य क्षेत्र तक पहुंचेगा। करीब 1600 करोड़ रुपये की इस परियोजना से कटनी सहित पांच जिलों की 1.85 लाख हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि सिंचित होगी और लाखों लोगों को लाभ मिलेगा।
इस परियोजना को वर्ष 2008 में मंजूरी मिली थी और 2011 में निर्माण शुरू हुआ। करीब 30 मीटर गहराई में जर्मनी की अत्याधुनिक टनल बोरिंग मशीन से सुरंग बनाई गई। निर्माण के दौरान भूजल, सिंकहोल, कोरोना महामारी और कठोर चट्टानों जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इन कारणों से परियोजना की लागत 799 करोड़ रुपये से बढ़कर 1600 करोड़ रुपये से अधिक हो गई।
सुरंग के शुरू होने से कटनी की 21,823 हेक्टेयर, मैहर की 54,227 हेक्टेयर, सतना की 1,04,970 हेक्टेयर, पन्ना की 448 हेक्टेयर और रीवा की 3,084 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई का लाभ मिलेगा। साथ ही कटनी शहर की पेयजल व्यवस्था भी नर्मदा जल से मजबूत होगी। बरगी व्यपवर्तन परियोजना की दाईं तट मुख्य नहर प्रदेश की सबसे अधिक 227 क्यूमेक जल वहन क्षमता वाली नहर होगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दौरे को लेकर जिला प्रशासन ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। कलेक्टर आशीष तिवारी और एसपी अभिनय विश्वकर्मा ने परियोजना स्थल का निरीक्षण कर सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया। अधिकारियों का कहना है कि यह परियोजना केवल इंजीनियरिंग की उपलब्धि नहीं, बल्कि विंध्य क्षेत्र के कृषि, पेयजल और आर्थिक विकास का नया अध्याय साबित होगी।


